पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश को कर्ज के ऐसे भंवर में धकेल दिया है, जिसने उधारी के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के हालिया दस्तावेजों के अनुसार, शहबाज शरीफ ने अपने दो कार्यकालों यानी महज 3 साल 9 महीनों के भीतर देश पर 37,307 अरब रुपये का नया कर्ज लाद दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान का कुल संघीय कर्ज 83,883 अरब रुपये के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ‘द न्यूज पाकिस्तान’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज लेने के मामले में शहबाज ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान समेत सभी नेताओं को पीछे छोड़ दिया है।
इमरान खान के दौर से अब तक के आंकड़े
बैंक दस्तावेजों के मुताबिक, अगस्त 2018 में इमरान खान के सत्ता संभालने से पहले पाकिस्तान का कुल कर्ज 24,690 अरब रुपये था। मार्च 2022 में इमरान खान के सत्ता से हटने तक यह उधारी बढ़कर 43,000 अरब रुपये हो चुकी थी। इसके बाद जब शहबाज शरीफ पहली बार सत्ता में आए, तो उन्होंने शुरुआती 16 महीनों में ही 18,764 अरब रुपये का नया कर्ज ले लिया, जिससे कुल आंकड़ा 61,777 अरब रुपये पहुंच गया। वहीं, मार्च 2024 से जुलाई 2026 के बीच अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने 18,543 अरब रुपये की अतिरिक्त उधारी ले ली।
जनता पूछ रही सवाल
इतने हजार अरब रुपये का भारी-भरकम कर्ज लेने के बावजूद पाकिस्तान के आम नागरिकों के जीवन में कोई सुधार नहीं आया है। पाकिस्तान की जनता सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक यह सवाल पूछ रही है कि आखिर यह सारा पैसा गया कहां? देश की आर्थिक स्थिति इतनी खस्ताहाल है कि आम जनता को रोजमर्रा के राशन और आटे के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
बिजली बिल और महंगाई की मार
पाकिस्तान में इस समय बिजली के बिलों ने आम नागरिकों की कमर तोड़ रखी है और महंगाई चरम पर है। देश के पास अपने बुनियादी खर्च चलाने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है, जिसके कारण शहबाज सरकार को लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने वित्तीय सहायता के लिए गुहार लगानी पड़ रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज के इस भारी बोझ से पाकिस्तान का बाहर निकलना अब बेहद चुनौतीपूर्ण हो चुका है।
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