प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के सीनियर सदस्य गुरुवार को एक अहम समीक्षा बैठक के लिए इकट्ठा हुए। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शामिल थे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के कारण संसद की कार्यवाही में बाधा आ रही है। छात्र यूनियनों के समर्थन से कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने इस साल की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
लगभग दो महीने तक चले इस आंदोलन में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन उपवास भी शामिल था। पिछले हफ्ते वांगचुक के विरोध प्रदर्शन वापस लेने और प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन खत्म हुआ।
युद्ध के असर पर भी चर्चा होने की संभावना
बैठक में अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और यूक्रेन युद्ध के असर पर भी चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि इन दोनों का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी यह बताती है कि घरेलू राजनीतिक स्थिति से निपटने के साथ-साथ सप्लाई लाइनों और व्यापार को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
यह बैठक मोदी द्वारा साल भर की गई ऐसी ही समीक्षाओं जैसी ही है। इससे पहले भी उन्होंने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए पुरी, गोयल और सीतारमण के साथ बैठकें की थीं।
नई दिल्ली ने बार-बार बाजारों और नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि देश का ईंधन स्टॉक और घरेलू उत्पादन उस क्षेत्र से पैदा होने वाली किसी भी रुकावट का सामना कर सकता है। गुरुवार की बैठक के नतीजों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और आगे की जानकारी का इंतजार है।
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