HomeBreaking Newsऑनलाइन नहीं चलेगा भाई! 2000 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल लिया तो...

ऑनलाइन नहीं चलेगा भाई! 2000 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल लिया तो देना होगा कैश, जानिए पूरा माजरा!

15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क का देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वे 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के ईंधन खरीद पर यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। इस सीमा से ऊपर के भुगतानों के लिए केवल नकद (कैश) ही लिया जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार, पहले से ही कम मार्जिन होने की वजह से नई व्यवस्था से हर पेट्रोल पंप को हर महीने करीब 17,700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।

आम जनता पर नहीं पड़ेगा कोई असर

सरकार और नियामक निकायों का स्पष्ट कहना है कि इस नए एमडीआर नियम से आम नागरिकों और ग्राहकों पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। 15 अक्टूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कमर्शियल यूपीआई भुगतान पर लगने वाला 0.40 प्रतिशत का शुल्क केवल व्यापारियों को ही चुकाना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि आप किसी सामान्य मर्चेंट को 3,000 रुपये का यूपीआई पेमेंट करते हैं, तो उस व्यापारी को 12 रुपये का एमडीआर शुल्क देना होगा।

आवश्यक सेवाओं के लिए केवल फिक्स्ड 5 रुपये

पेट्रोल पंप, रेलवे टिकट, बीमा और टेलीकॉम जैसी रोजमर्रा की बेहद जरूरी सेवाओं को एमडीआर में बड़ी राहत दी गई है। इन सेवाओं पर प्रतिशत के आधार पर चार्ज लगाने के बजाय सिर्फ 5 रुपये का फिक्स्ड एमडीआर तय किया गया है। इसका मतलब है कि अगर आप 2,000 रुपये से अधिक चाहे 2,500 रुपये का पेट्रोल भरवाएं या 50,000 रुपये की बीमा किस्त भरें दुकानदार या सेवा प्रदाता पर केवल 5 रुपये का ही चार्ज लगेगा। इसके अतिरिक्त, बड़े कारोबारियों के लिए 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन पर अधिकतम एमडीआर कैपिंग 300 रुपये रखी गई है।

छोटे दुकानदारों को पूरी छूट

सब्जी विक्रेताओं, चाय वालों, ऑटो ड्राइवरों और छोटे किराना दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किया है। जिन छोटे व्यापारियों का महीने का कुल यूपीआई क्यूआर (QR) कलेक्शन 1 लाख रुपये तक है, उन्हें P2PM श्रेणी में रखा गया है। ऐसे छोटे कारोबारियों के लिए एमडीआर दर पूरी तरह शून्य (0%) रहेगी, भले ही उनका कोई ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से अधिक का क्यों न हो।

95 फीसदी व्यापारी रहेंगे बेअसर

आंकड़ों के अनुसार, भारत में होने वाले कुल मर्चेंट यूपीआई पेमेंट्स में से 96 फीसदी से अधिक ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये या उससे कम राशि के होते हैं। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से देश के 95 प्रतिशत से अधिक छोटे और मध्यम कारोबारी एमडीआर शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। इसके बावजूद व्यापारी संगठनों का मानना है कि इस कदम से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की मुहिम प्रभावित हो सकती है।

 

READ MORE: भारतीय हॉकी की ‘ग्रेट वॉल’ सविता पूनिया ने रचा नया इतिहास, पीछे छूटे दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments