नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट चलन से बाहर हो गए थे। करीब एक दशक बाद उत्तर प्रदेश के हापुड़ में इन्हीं नोटों की बड़ी खेप बरामद हुई है। पुलिस ने एक बाइक सवार को पकड़कर उसके पास से 1 करोड़ 44 लाख रुपये के पुराने नोट बरामद करने का दावा किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान देवेंद्र उर्फ रैला के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह इन नोटों को लेकर मेरठ जा रहा था।
NH-9 की सर्विस रोड पर चेकिंग के दौरान पकड़ा गया आरोपी
पुलिस के मुताबिक, 8 अक्टूबर को हापुड़ स्वाट टीम और थाना हापुड़ देहात पुलिस की संयुक्त टीम संदिग्ध लोगों और वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एनएच-9 की सर्विस रोड पर एक पेट्रोल पंप के सामने बाइक सवार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों की बड़ी खेप मिली। पुलिस ने इनकी कुल कीमत 1.44 करोड़ रुपये बताई है। नोटों के साथ बाइक भी जब्त कर ली गई और आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई।
मेरठ में दो लोगों को नोट सौंपने का दावा
पुलिस ने बताया कि आरोपी देवेंद्र उर्फ रैला गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र के गांव पचोतक का रहने वाला है। उसका वर्तमान पता गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र की फ्री होल्ड मार्केट में लाल बिल्डिंग के पास बताया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी पुराने नोट लेकर मेरठ जा रहा था, जहां उसे दो लोगों को ये नोट सौंपने थे। हालांकि, उन दोनों व्यक्तियों की पहचान और कथित लेन-देन से जुड़ी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों को नई करेंसी दिलाने का झांसा देकर पुराने नोटों के सौदे कराता था और इसके बदले कमीशन लेता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद नोट कहां से आए और इस मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका है।
नोटबंदी के बाद पुराने नोटों की बरामदगी से उठे सवाल
नवंबर 2016 में केंद्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने का ऐलान किया था। इसके बाद पुराने नोटों को बदलने के लिए बैंकों में लंबी कतारें लगी थीं। अब हापुड़ में इतनी बड़ी मात्रा में पुराने नोट मिलने से उनके स्रोत और कथित सौदे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक महेश कुमार के मुताबिक, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नोट किसके पास थे, इन्हें मेरठ में किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क भी शामिल है। फिलहाल, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
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