इंसान को पहली बार चांद पर पहुंचाने वाले अमेरिकी अपोलो-11 मिशन की सफलता में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की अहम भूमिका थी। इस सॉफ्टवेयर को तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाली मार्गरेट हैमिल्टन अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 90 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके निधन की जानकारी दी। संस्थान के मुताबिक, उन्होंने 30 सितंबर को अंतिम सांस ली थी।
जब सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को नहीं मिली थी अलग पहचान
मार्गरेट हैमिल्टन ने ऐसे दौर में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में काम शुरू किया, जब सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को आज की तरह अलग पेशेवर पहचान नहीं मिली थी। उन्होंने MIT की एक लैब में प्रोग्रामिंग सीखी और शुरुआत में ऐसे सॉफ्टवेयर पर काम किया, जो दुश्मन के विमानों का पता लगाने में मदद करता था। बाद में MIT को NASA के अपोलो मिशन के लिए अंतरिक्ष यान का सॉफ्टवेयर तैयार करने की जिम्मेदारी मिली। मार्गरेट इस प्रोजेक्ट से जुड़ीं और उस टीम का नेतृत्व किया, जिसने अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक पहुंचाने वाले मिशन के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर बनाया। उन्होंने ‘सॉफ्टवेयर इंजीनियर’ शब्द को लोकप्रिय पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। 2019 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि इस प्रोजेक्ट ने उन्हें आकर्षित किया, क्योंकि यह ऐसा काम था जिसे पहले किसी ने नहीं किया था। वह इस प्रोजेक्ट से जुड़ने वाली पहली प्रोग्रामर थीं और इसके लिए नियुक्त की गई पहली महिला भी थीं।
चांद पर उतरने से पहले कंप्यूटर में बजने लगे थे अलार्म
20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन के दौरान नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद की सतह पर उतरने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान अंतरिक्ष यान के कंप्यूटर में अलार्म बजने लगे। कंप्यूटर पर एक साथ कई कामों का दबाव था और मिशन की सफलता पर खतरा पैदा हो सकता था। ऐसे समय में सॉफ्टवेयर ने कम जरूरी कामों को पीछे रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देशों को प्राथमिकता दी। सिस्टम में गड़बड़ियों को पहचानने और जरूरी काम जारी रखने की व्यवस्था मौजूद थी। इसी क्षमता ने कंप्यूटर पर दबाव के बावजूद लैंडिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद की। इस घटना ने अंतरिक्ष अभियानों में सॉफ्टवेयर की अहमियत को सामने रखा। मिशन की सफलता केवल रॉकेट और अंतरिक्ष यात्रियों पर निर्भर नहीं थी, बल्कि ऐसे प्रोग्राम पर भी टिकी थी, जो मुश्किल हालात में कंप्यूटर को सही निर्देशों पर काम करते रहने में मदद कर सके।
बराक ओबामा ने दिया था अमेरिका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
मार्गरेट हैमिल्टन के योगदान को अमेरिका ने भी बड़े स्तर पर सम्मानित किया। साल 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम प्रदान किया था। यह अमेरिका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। सम्मान के दौरान ओबामा ने अपोलो मिशन में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा था कि अंतरिक्ष यात्रियों के पास समय कम था, लेकिन उनके पास मार्गरेट हैमिल्टन थीं। मार्गरेट ने अपने काम से यह स्थापित करने में मदद की कि अंतरिक्ष विज्ञान में सॉफ्टवेयर केवल तकनीकी सहायता नहीं, बल्कि मिशन की सुरक्षा और सफलता का बुनियादी हिस्सा है। उनके परिवार में बेटी, दामाद, दो नाती और चार परनाती हैं। उनका योगदान कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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