Bhandsar Jain Temple: राजस्थान के बीकानेर में स्थित भांडसर जैन मंदिर अपनी अनोखी निर्माण शैली और सदियों पुरानी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों का दावा है कि इसके निर्माण में पानी की एक बूंद तक इस्तेमाल नहीं की गई थी। कहा जाता है कि कारीगरों ने गारा तैयार करने के लिए करीब 40,000 किलो घी का इस्तेमाल किया था। यही वजह है कि गर्मियों के दौरान मंदिर की कुछ दीवारों और फर्श में आज भी घी जैसी हल्की चिकनाहट महसूस होने की बात कही जाती है।
15वीं सदी में शुरू हुआ था निर्माण
भांडसर जैन मंदिर का निर्माण 15वीं सदी में एक धनी जैन व्यापारी भांडा शाह, जिन्हें भांडासा ओसवाल के नाम से भी जाना जाता है, ने शुरू करवाया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसका निर्माण करीब 1468 ईस्वी में शुरू हुआ था। उस दौर में बीकानेर थार रेगिस्तान में एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा था और पानी की कमी आम समस्या थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी परिस्थिति में मंदिर के निर्माण में गारे के लिए पानी की जगह घी का इस्तेमाल किया गया।
भांडा शाह से जुड़ी है दिलचस्प कहानी
मंदिर से जुड़ी एक और प्रसिद्ध किंवदंती भांडा शाह से संबंधित है। कहा जाता है कि एक वास्तुकार ने उन्हें कंजूस कहकर उनका मजाक उड़ाया था, क्योंकि उन्होंने जमीन पर गिरा घी बचा लिया था। इस बात से नाराज होकर भांडा शाह ने मंदिर के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में घी दान कर दिया। हालांकि, यह घटना स्थानीय मान्यता और किंवदंती के रूप में ही बताई जाती है।
भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है मंदिर
भांडसर जैन मंदिर जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है। मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ इसकी स्थापत्य शैली भी इसे बीकानेर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल करती है।
लाल और पीले पत्थरों से बनी इमारत
मंदिर के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और पीले पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसमें संगमरमर का उपयोग नहीं किया गया। मंदिर के भीतर बारीक नक्काशी, शीशे का काम और सजावटी डिजाइन देखने को मिलते हैं। खंभों पर फूलों की आकृतियां और छतों पर ज्यामितीय डिजाइन इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं।
दीवारों पर दिखती हैं जैन धर्म की कथाएं
मंदिर की दीवारों पर बने भित्ति चित्र जैन धार्मिक विषयों और 24 तीर्थंकरों से जुड़ी कहानियों को दर्शाते हैं। इसकी सजावट और निर्माण तकनीक पर बीकानेर के स्थानीय कलाकारों की कला का प्रभाव भी दिखाई देता है। तीन मंजिला यह मंदिर राजस्थान के पुराने स्मारकों में अपनी अलग पहचान रखता है।
108 फीट ऊंचे मंदिर को मिला है संरक्षण
भांडसर जैन मंदिर करीब 108 फीट ऊंचा है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई इसकी विरासत संरचना के रूप में देखरेख करता है। धार्मिक महत्व के अलावा इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत भी इसे खास बनाती है।
आज भी घी की चिकनाहट महसूस होने का दावा
स्थानीय लोगों के बीच आज भी यह मान्यता प्रचलित है कि गर्मियों के सबसे गर्म दिनों में मंदिर के फर्श और दीवारों की दरारों से घी की हल्की चिकनाहट महसूस की जा सकती है। यही अनोखी मान्यता भांडसर जैन मंदिर को बीकानेर के दूसरे ऐतिहासिक स्थलों से अलग बनाती है।
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