फ्रांस के बाद अब लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में छात्रों और युवाओं का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। रियो डी जनेरियो की सड़कों पर हज़ारों की संख्या में युवाओं और छात्रों ने उतरकर दक्षिणपंथी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं यानी ‘जेन जी’ के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने हाथ में पोस्टर लेकर “बोल्सोनारो कभी नहीं”, “ना पिता, ना बेटा” और “तानाशाही बाहर जाओ” जैसे तीखे नारे लगाए।
पहले दौर के नतीजों से भड़का जनआक्रोश
यह राजनीतिक भूचाल राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजों के बाद आया है, जिसमें दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने 47 प्रतिशत वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और वर्तमान वामपंथी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा (45% वोट) को पीछे छोड़ दिया। फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं, जो वर्तमान में भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में जेल में बंद हैं। चूंकि किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए आवश्यक 50 प्रतिशत बहुमत नहीं मिला, इसलिए अब 25 अक्टूबर को दोनों नेताओं के बीच अंतिम और निर्णायक मुकाबला होगा।
अमरीकी उपनिवेश बनने और लोकतंत्र खोने का डर
अल जजीरा और डायचे वेले की रिपोर्ट के अनुसार, बोल्सोनारो की संभावित जीत से देश के नागरिक और छात्र लोकतंत्र के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। प्रदर्शन में शामिल 20 साल के छात्र जोआओ विक्टर विएरा ने डर जताया कि डोनाल्ड ट्रंप समर्थक विचारधारा वाले बोल्सोनारो के आने से ब्राजील अमेरिका की कठपुतली बन सकता है। वहीं 19 वर्षीय छात्र इमैनुएल अराउजो और 25 वर्षीया एलिस कार्नेइरो का कहना है कि यह लड़ाई किसी नेता विशेष की नहीं बल्कि बोलने की आजादी, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को बचाने की है। अब पूरे देश की नजरें 25 अक्टूबर के अंतिम चुनाव पर टिकी हैं।
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