मलेशिया जाकर नौकरी तलाशने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए भारतीय उच्चायोग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। क्वालालंपुर स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि भारत के पर्यटकों को मिलने वाली 30 दिनों की वीजा-फ्री सुविधा केवल घूमने-फिरने और पारिवारिक या सामाजिक यात्राओं के लिए है। फर्जी एजेंटों के झांसे में आकर इस टूरिस्ट एंट्री का इस्तेमाल नौकरी ढूंढने के लिए करना भारी पड़ सकता है, जिससे भारतीय नागरिक सीधे कानूनी शिकंजे और जेल की सलाखों के पीछे पहुंच सकते हैं।
शातिर एजेंटों के झांसे में आकर जिंदगी दांव पर लगा रहे युवा
दूतावास के संज्ञान में आया है कि कई फर्जी एजेंट भोले-भाले युवाओं को मलेशिया में मोटी कमाई और नौकरी का झूठा सपना दिखाकर वहां भेज रहे हैं। लोग बिना सोचे-समझे टूरिस्ट वीजा या वीजा-फ्री सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं। आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने पर 30 दिन की समयसीमा खत्म होते ही व्यक्ति अवैध प्रवासी बन जाता है। इसके चलते लोगों को वहां शोषण का शिकार होना पड़ता है और अंततः मलेशियाई इमीग्रेशन अथॉरिटी द्वारा उन्हें हिरासत में लेकर सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
मलेशिया में वैध काम के लिए वर्क परमिट और वीडीआर जरूरी
भारतीय उच्चायोग ने साफ किया है कि टूरिस्ट वीजा पर मलेशिया में काम करने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक वहां कानूनी रूप से रोजगार हासिल करना चाहता है, तो उसे भारत छोड़ने से पहले ही वैध वर्क परमिट अथवा ‘वीजा विद रेफरेंस’ (VDR) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बिना इन आधिकारिक दस्तावेजों के काम करना मलेशिया के आव्रजन कानूनों के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
असली पर्यटकों के लिए जारी किए गए 3 अहम नियम
मलेशिया यात्रा पर जा रहे वास्तविक पर्यटकों की सुविधा के लिए दूतावास ने कुछ जरूरी निर्देश भी दिए हैं। यात्रियों के पास कन्फर्म रिटर्न टिकट और होटल बुकिंग के सत्यापन योग्य कागजात होने चाहिए। साथ ही, मलेशिया पहुंचने से कम से कम 3 दिन पहले ‘मलेशिया डिजिटल अराइवल कार्ड’ (MDAC) ऑनलाइन भरना अनिवार्य है। इसके अलावा, यात्रियों के पासपोर्ट में न्यूनतम 6 महीने की वैधता होना जरूरी है ताकि आव्रजन स्तर पर कोई असुविधा न हो।
READ MORE: कंगाल देश के पीएम शहबाज की न्यूयॉर्क में अंतरराष्ट्रीय फजीहत, ‘चोर-चोर’ के पोस्टरों से पटी अमेरिका की सड़कें!