ISRO Mission 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब मिशनों की रफ्तार बढ़ाने में जुट गया है। 4 सितंबर को इस साल का दूसरा मिशन लॉन्च करने के बाद ISRO अब भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए NVS-03 सैटेलाइट को 15 से 20 अक्टूबर के बीच लॉन्च किया जा सकता है। फिलहाल आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सैटेलाइट को असेंबल करने का काम चल रहा है। इसके साथ ही तीन अन्य बड़े मिशन भी कतार में हैं, जिन्हें इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है।
जनवरी में फेल हुआ था पहला मिशन
ISRO ने इस साल अपना पहला मिशन 12 जनवरी को लॉन्च किया था। EOS-05 मिशन के तहत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा गया था। हालांकि, रॉकेट के थर्ड स्टेज में तकनीकी खराबी आने के कारण सैटेलाइट तय कक्षा में स्थापित नहीं हो सका और मिशन असफल रहा। इसके बाद ISRO ने कुछ समय तक लॉन्चिंग गतिविधियों पर विराम रखा।
सितंबर में मिली बड़ी सफलता
करीब आठ महीने बाद 4 सितंबर को ISRO ने साल का दूसरा मिशन लॉन्च किया। GSLV-F17 रॉकेट के जरिए जियोसिंक्रोनस इमेजिंग सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसे सफलतापूर्वक लोअर अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया। इस सफलता के बाद ISRO ने अगले मिशनों की तैयारी तेज कर दी और NVS-03 पर काम आगे बढ़ाया।
क्या है NVS-03 मिशन?
NVS-03 भारत का दूसरी पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट्स की सीरीज का तीसरा उपग्रह है। इसका उद्देश्य भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करना है। यह भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में सटीक लोकेशन और नेविगेशन सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेगा। NVS-03 को GSLV-F18 रॉकेट से लॉन्च किया जाना है।
NVS-02 की असफलता के बाद खास तैयारी
NVS-03 की लॉन्चिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले पिछले साल NVS-02 को लॉन्च किया गया था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण वह मिशन सफल नहीं हो सका था। ऐसे में NVS-03 को बेहतर सुरक्षा और अतिरिक्त सावधानियों के साथ लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है।
NavIC को क्यों चाहिए नया सैटेलाइट
भारत की NavIC प्रणाली को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए कम से कम चार सैटेलाइट जरूरी माने जाते हैं, जबकि फिलहाल यह तीन सैटेलाइट के भरोसे काम कर रही है। पहले INSS-1A, INSS-1B, INSS-1i और NVS-01 इसके नेटवर्क का हिस्सा थे। इनमें INSS-1A अपनी निर्धारित 10 साल की अवधि दो साल पहले पूरी कर चुका है। ऐसे में NavIC की क्षमता बनाए रखने और उसे मजबूत करने के लिए NVS-03 की भूमिका अहम होगी। इसके अलावा ISRO ने NVS-04 और NVS-05 पर भी काम शुरू कर दिया है।
गगनयान भी मिशन की कतार में
ISRO की तैयारी सिर्फ NVS-03 तक सीमित नहीं है। मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान भी प्रमुख मिशनों में शामिल है। मुख्य मानव मिशन से पहले तीन मानव रहित परीक्षण उड़ानें की जानी हैं। इनमें पहली उड़ान G-1 इसी साल के अंत में हो सकती है। इसमें व्योममित्र नाम के रोबोट अंतरिक्ष यात्री को भेजकर अंतरिक्ष यान और रॉकेट की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।
12 सैटेलाइट और 8 मिशनों की तैयारी
ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, संगठन इस साल 12 सैटेलाइट तैयार करने और 8 मिशन लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है। इनमें नेविगेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और वैज्ञानिक शोध से जुड़े मिशन शामिल हैं। इसके साथ ही ISRO कई बड़े और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों पर भी काम कर रहा है।
गगनयान G2 और G3
पहली मानव रहित उड़ान के बाद गगनयान की दो और मानव रहित परीक्षण उड़ानें G2 और G3 प्रस्तावित हैं। इन्हें इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है। इन परीक्षणों के बाद भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में आगे बढ़ेगा।
गगनयान H1
गगनयान H1 भारत का पहला ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष मिशन होगा। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्री धरती की निचली कक्षा में करीब तीन दिन रहेंगे। इस मिशन के सफल होने के बाद अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
चंद्रयान-4 से चांद के नमूने आएंगे
ISRO चंद्रयान-4 पर भी काम कर रहा है। यह लूनर सैंपल रिटर्न मिशन होगा। इसके तहत लैंडर चांद की सतह पर उतरकर वहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने जुटाएगा और उन्हें धरती पर वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।
शुक्र और मंगल पर भी नजर
ISRO का वीनस मिशन मार्च 2028 तक लॉन्च किया जा सकता है। इसका उद्देश्य शुक्र ग्रह की सतह और उसके वायुमंडल का अध्ययन करना है। इसके अलावा मंगलयान-2 की भी तैयारी चल रही है, जिसके जरिए मंगल ग्रह के बारे में पहले से ज्यादा वैज्ञानिक जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी।
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