NEET Paper Leak Case: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट CBI की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की कई धाराओं के तहत दाखिल की गई है। मामले पर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बुधवार को संज्ञान ले सकती है। सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच अभी भी जारी
CBI ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी ने आगे की जांच खुली रखी है और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक की पूरी कड़ी का पता लगाया जा चुका है और लीक हुए प्रश्नपत्र के स्रोत के साथ उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले लोगों की भी पहचान की गई है।
360 गवाह और 43 अहम सबूत
CBI ने अपनी चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 अहम सबूत शामिल किए हैं। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य पेपर लीक की साजिश रचने और उसको पूरी करने की पुष्टि करते हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
CBI ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(a) तथा सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 10 के साथ धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
12 मई को दर्ज हुई थी FIR
CBI के मुताबिक, यह मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद सामने आया था। इसके बाद केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2026 को CBI को शिकायत सौंपी थी। इसी शिकायत के आधार पर उसी दिन एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के लिए CBI ने 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की कई टीमें गठित की थीं।
92 स्थानों पर हुई छापेमारी
जांच के दौरान CBI ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत बरामद किए गए, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई गई। एजेंसी ने आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाते को भी फ्रीज किया है। CBI को डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय और सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट भी मिली है। एजेंसी का कहना है कि इन रिपोर्टों से यह पता चला है कि परीक्षा से पहले ही लीक हुए प्रश्नों का प्रसार किया गया था।
13 लोगों की हुई गिरफ्तारी
CBI के अनुसार इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई 2026 को हुई थी। अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें NTA के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स, कई बिचौलिये और दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि बिचौलियों ने लीक प्रश्नपत्र हासिल कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया, जबकि कोचिंग संस्थानों से जुड़े आरोपियों ने लीक पेपर खरीदने और उसका इस्तेमाल करने का काम किया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे भी कार्रवाई संभव
CBI ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और फॉरेंसिक विश्लेषण के साथ सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
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चार्जशीट में शामिल 13 आरोपी
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मनीषा मंधारे – NTA बायोलॉजी एक्सपर्ट
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प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी – NTA केमिस्ट्री एक्सपर्ट
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मनीषा संजय हवालदार – NTA फिजिक्स एक्सपर्ट
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मनीषा संजय वाघमारे – बिचौलिया
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धनंजय निवृत्ति लोखंडे – बिचौलिया
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शुभम माधुकर खैरनार – बिचौलिया
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यश यादव -बिचौलिया
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मंगलिलाल बिवाल -बिचौलिया
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विकास बिवाल -बिचौलिया
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दिनेश बिवाल – बिचौलिया
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डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे – बिचौलिया
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शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर – RCC कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के मालिक
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तेजस हर्षदकुमार शाह – APMA कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में फिजिक्स फैकल्टी और COO
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