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भारतीय क्रिकेट में उम्र के फर्जीवाड़े का नया बवंडर, बोन टेस्ट रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर BCCI ने शुरू की जांच

क्रिकेट जगत में उम्र की धोखाधड़ी का पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार मामला खिलाड़ियों से आगे बढ़कर उस मेडिकल प्रक्रिया तक पहुंच गया है, जिसके जरिए उम्र की सच्चाई का पता लगाया जाता है। जूनियर स्तर पर खिलाड़ियों द्वारा गलत आयु बताने की समस्या पर लगाम कसने के लिए अनिवार्य किए गए ‘बोन टेस्ट’ की रिपोर्टों में ही भारी विसंगतियां और धांधली सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने इस पूरे प्रकरण की अंदरखाने जांच शुरू कर दी है।

बोन टेस्ट रिपोर्ट में उम्र घटने का अजीबोगरीब मामला आया सामने

हाल ही में हुए एक बड़े खुलासे में कुछ अनाम क्रिकेटरों की बोन टेस्ट रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ियों की पोल खुली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अंडर-16 वर्ग के खिलाड़ियों की बोन टेस्ट रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा देखने को मिला है। हैरानी की बात तो यह है कि जो खिलाड़ी पिछले साल की जांच में 16 वर्ष का पाया गया था, साल 2026 में उसकी उम्र एक साल बढ़ने के बजाय उल्टी दो महीने कम दर्ज कर दी गई। इस तरह के कई अन्य संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने खेल प्रशासकों और चयनकर्ताओं को चौंका दिया है।

बीसीसीआई ने मांगी गुप्त जानकारियां

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए गोपनीय स्तर पर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। हालांकि बोर्ड की तरफ से अभी तक इस पर कोई औपचारिक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई के अधिकारियों ने कुछ प्रमुख शिकायतकर्ताओं से संपर्क साधकर प्रासंगिक दस्तावेज और जानकारियां जुटाना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश दोनों ही क्रिकेट एसोसिएशनों के लिए इस साल बोन टेस्ट की प्रक्रिया को अंजाम देने वाली एजेंसी या कंपनी एक ही थी, जिसके चलते बोर्ड इस पूरे खेल में किसी गहरी मिलीभगत या सिंडिकेट की आशंका से इनकार नहीं कर रहा है।

जूनियर क्रिकेट में पारदर्शी चयन के लिए बोन टेस्ट है अनिवार्य प्रक्रिया

खेल के मैदान पर आयु संबंधी धोखाधड़ी को रोकने के लिए मेडिकल साइंस की मदद ली जाती है, जिसे बोन टेस्ट यानी अस्थि परीक्षण कहा जाता है। यह एक स्थापित चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिससे किसी भी युवा खिलाड़ी की शारीरिक हड्डियों के विकास के आधार पर उसकी सही उम्र का सटीक अनुमान लगाया जाता है। चूंकि क्रिकेट सहित तमाम खेलों में विभिन्न आयु-वर्ग की प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, इसलिए बीसीसीआई ने जूनियर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने वाले हर खिलाड़ी के लिए इस टेस्ट को अनिवार्य कर रखा है, ताकि बड़े उम्र के खिलाड़ी छोटी उम्र के मुकाबलों में अनुचित लाभ न उठा सकें।

 

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