US pressures Cuba at UN: संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को खत्म करने के प्रस्ताव पर भारत समेत 130 देशों ने अमेरिका के खिलाफ मतदान किया। बुधवार को हुए मतदान में 130 देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया, जबकि अमेरिका, इजरायल समेत 17 देशों ने इसका विरोध किया। वहीं 25 देश मतदान से दूर रहे। हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस बार प्रस्ताव को काफी कम समर्थन मिला है।
30 साल में सबसे कम समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह प्रस्ताव साल 1992 से हर साल पेश किया जाता है। इस बार इसे पिछले कई वर्षों के मुकाबले सबसे कम समर्थन मिला।
पिछले साल प्रस्ताव के पक्ष में 165 वोट पड़े थे, जबकि इस बार 130 देशों ने समर्थन किया। 17 देशों ने विरोध किया और 25 देश मतदान से दूर रहे। जर्मनी और इटली जैसे देशों ने भी इस बार प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने के बजाय मतदान से दूरी बनाई।
अमेरिका ने बताया कूटनीतिक जीत
कम समर्थन मिलने के बाद अमेरिका ने इस मतदान को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि उन्हें इस बात से संतोष है कि दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं समेत कई देशों ने अपना रुख बदला है।
अमेरिका 1992 से लगभग हर साल इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करता आया है। हालांकि, 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका मतदान से दूर रहा था। उस समय दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने की कोशिशें चल रही थीं।
UN में अमेरिका-क्यूबा के बीच तीखी बहस
क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में माहौल काफी गरमा गया था। बहस के दौरान अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने क्यूबा की सरकार पर दमन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसी दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला ने उनके भाषण पर आपत्ति जताई और उन्हें रोकने की मांग की।
इस पर वॉल्ट्ज ने कहा, ‘यह संयुक्त राष्ट्र है, आपकी कम्युनिस्ट तानाशाही नहीं. आप मुझे चुप नहीं करा सकते.’ इसके जवाब में क्यूबा के विदेश मंत्री ने उन्हें झूठा बताया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और कार्यवाही कुछ देर के लिए रोकनी पड़ी।
क्यूबा ने अमेरिका पर दबाव डालने का लगाया आरोप
क्यूबा ने अमेरिका पर सदस्य देशों को प्रस्ताव के खिलाफ वोट देने के लिए दबाव डालने का भी आरोप लगाया। क्यूबा का दावा है कि अमेरिका ने कुछ देशों को वीजा प्रतिबंधों और आर्थिक पाबंदियों की धमकी दी। हालांकि, इस मतदान का प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है।
यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के आधार पर अमेरिका को अपने प्रतिबंध हटाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
प्रतिबंधों से क्यूबा में बढ़ी परेशानी
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने आरोप लगाया कि अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए क्यूबा के लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। क्यूबा लंबे समय से दावा करता रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जरूरी सामान की कमी, महंगाई और बिजली संकट बढ़ा है।
हाल के महीनों में ईंधन की कमी और लंबे समय तक होने वाली बिजली कटौती ने भी आम लोगों की परेशानियां बढ़ाई हैं। क्यूबा का कहना है कि अमेरिका आर्थिक दबाव के जरिए देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
भारत समेत कई देशों ने दिया क्यूबा का साथ
इस पूरे मामले में भारत ने क्यूबा पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को खत्म करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, प्रस्ताव को समर्थन देने वाले देशों की संख्या पिछले साल के मुकाबले कम रही, लेकिन भारत समेत 130 देशों का समर्थन यह दिखाता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अब भी बड़ी संख्या में देश क्यूबा पर अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को खत्म करने के पक्ष में हैं।
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