Uttarakhand Legislative Assembly Session: उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा का अंतिम सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण में खत्म हो गया। मौजूदा सरकार के इस अंतिम सत्र की कुल कार्यवाही आठ घंटे चार मिनट चली। सत्र के दौरान अनुपूरक बजट समेत 10 अहम विधेयक पारित किए गए, जबकि दो अध्यादेश भी सदन के पटल पर रखे गए। सत्र की शुरुआत शांत माहौल में हुई, लेकिन दूसरे दिन कार्यवाही अपेक्षाकृत कम समय में पूरी हो गई।
पहले दिन सात घंटे चली कार्यवाही
मौजूदा विधानसभा का अंतिम सत्र होने के कारण सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में अनुपूरक बजट समेत कई अहम विधेयक पेश किए। पहले दिन सदन की कार्यवाही लगातार करीब सात घंटे चली। उम्मीद थी कि प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़े सवालों पर विस्तार से चर्चा होगी।
दूसरे दिन 1 घंटे 4 मिनट में समापन
सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल हंगामे के बीच पूरा हुआ। इसके बाद सदन की बाकी कार्यवाही भी कम समय में पूरी कर ली गई। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इससे पहले सत्र के पहले दिन पूरे सदन ने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूड़ी (सेनि) और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी थी।
दस विधेयक हुए पारित
सत्र में सरकार की ओर से कुल 10 विधेयक पारित किए गए।
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उत्तराखंड विनियोग (अनुपूरक) विधेयक
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उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक
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उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड निवेश और आधारित संरचना (विकास और विनियमन) (संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड जनविश्वास (उपबंधों का संशोधन) द्वितीय विधेयक
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उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड सिविल विधि (संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा (संशोधन) विधेयक
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उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक
दो अध्यादेश भी सदन में रखे गए
सत्र के दौरान उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश और उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश भी सदन के पटल पर प्रस्तुत किए गए।
नियम 300 के तहत सभी 34 सूचनाएं स्वीकृत
सत्र में नियम 300 के तहत कुल 34 सूचनाएं प्राप्त हुईं और सभी को स्वीकार किया गया। नियम 53 के तहत 17 सूचनाएं मिलीं और सभी ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकृत हुईं। वहीं, नियम 58 के तहत सात सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से तीन स्वीकृत की गईं और दो को ध्यानाकर्षण के लिए स्वीकार किया गया।
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