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DNPA Act क्या है? नए डेटा प्रोटेक्शन कानून से बदलेंगे डिजिटल नियम…

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर, घर का पता, नाम और ऑनलाइन पहचान जैसी जानकारियां कई वेबसाइटों और ऐप्स के पास होती हैं। ऐसे में इन जानकारियों का सुरक्षित इस्तेमाल और उनकी गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन(Data Protection Law) एक्ट, 2023 (DPDP Act) बनाया गया। इस कानून का मकसद लोगों के निजी डिजिटल डेटा की सुरक्षा करना और उसका इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करना है।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को 11 अगस्त 2023 को संसद से मंजूरी मिली थी। यह कानून डिजिटल माध्यमों से जुटाई जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह, इस्तेमाल और सुरक्षा से जुड़े नियम तय करता है। इसके तहत कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं को लोगों के डेटा का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी आधार पर करना होता है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों की निजी जानकारी का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और उसका गलत इस्तेमाल न किया जाए।

किन जानकारियों को मिलती है सुरक्षा?

किसी व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, पता और डिजिटल पहचान जैसी जानकारियां व्यक्तिगत डेटा के दायरे में आ सकती हैं। कानून के तहत ऐसी जानकारी को संभालने वाली संस्थाओं को उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने होते हैं।

हालांकि, हर स्थिति में डेटा इस्तेमाल करने के लिए सहमति ही एकमात्र आधार नहीं है। कानून में कुछ वैध उपयोगों के लिए अन्य कानूनी आधार भी निर्धारित किए गए हैं।

डेटा फिड्यूशियरी और डेटा प्रिंसिपल क्या हैं?

इस कानून में दो महत्वपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

  • डेटा फिड्यूशियरी: वह कंपनी, संस्था या सरकारी विभाग जो किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल का उद्देश्य और तरीका तय करता है।

  • डेटा प्रिंसिपल: वह व्यक्ति जिसकी निजी जानकारी एकत्र की जाती है या इस्तेमाल की जाती है।

डेटा फिड्यूशियरी की जिम्मेदारी है कि वह कानून के अनुसार व्यक्तिगत जानकारी को संभाले और उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय करे।

नागरिकों को क्या होगा फायदा?

इस कानून से लोगों को अपने डिजिटल डेटा के इस्तेमाल के बारे में अधिक जानकारी और नियंत्रण मिलने का उद्देश्य है। नागरिक कानून में निर्धारित शर्तों के अनुसार अपने डेटा से जुड़ी जानकारी मांग सकते हैं उसमें सुधार या उसे मिटाने का अनुरोध कर सकते हैं और शिकायत निवारण की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वहीं, नियमों का पालन नहीं करने वाली संस्थाओं पर कानून के तहत कार्रवाई और आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।

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