नेपाल में एक बार फिर देश की धार्मिक पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस (नेकां) के नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले पार्टी गुट के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के तौर पर आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके बाद नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। सम्मेलन के समापन समारोह में देउबा ने कहा कि सनातन धर्म को ही नेपाल की पहचान बनाया जाना चाहिए।
प्रस्ताव में सभी धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
हालांकि सम्मेलन में पारित प्रस्ताव केवल हिंदू पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति आधारित धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की बात कही गई है। साथ ही सभी धर्मों और समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।प्रस्ताव में राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सभी राजनीतिक शक्तियों के साथ संवाद की बात भी कही गई है। इसके अलावा जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप संविधान में जरूरी संशोधन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
15वें महाधिवेशन को लेकर भी प्रस्ताव
शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में 15वें महाधिवेशन के आयोजन को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया है। सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी NP साउद समिति को दी गई है।
नेपाली कांग्रेस के दूसरे गुट ने जताई आपत्ति
इस प्रस्ताव को लेकर नेपाली कांग्रेस के दूसरे गुट ने आपत्ति जताई है। पार्टी प्रवक्ता विनोद चालिसे ने कहा कि सम्मेलन में हुए घटनाक्रम और नेताओं के बयानों पर पार्टी की नजर है। उन्होंने कहा कि जरूरत के मुताबिक पार्टी अपनी प्रतिक्रिया देगी। नेपाल 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना था। ऐसे में सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का प्रस्ताव देश की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था और नेपाल की धार्मिक पहचान को लेकर चल रही बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।
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