तेलंगाना के मंचेरियल जिले में बचत की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। यहां 51 वर्षीय आर. रवि जोसेफ ने तीन साल तक 10 रुपये के सिक्के जमा करके नई Honda Activa खरीदी। लक्सेट्टिपेट के रहने वाले जोसेफ पेशे से चर्च पादरी हैं। उन्होंने रोजमर्रा के खर्चों से मिलने वाले 10 रुपये के सिक्कों को संभालकर रखा और धीरे-धीरे कुल 1.23 लाख रुपये जमा कर लिए।
जोसेफ ने 10 अक्टूबर 2023 से सिक्के जमा करना शुरू किया था। उन्होंने तय किया कि खरीदारी या दूसरे रोजमर्रा के लेनदेन के दौरान जब भी 10 रुपये का सिक्का मिलेगा, उसे खर्च करने के बजाय बचाकर रखेंगे। तीन साल की लगातार कोशिश के बाद उनकी जमा रकम इतनी हो गई कि वह अपने लिए नया दोपहिया वाहन खरीद सके।
तीन साल तक जारी रखी कोशिश
जोसेफ ने बताया कि उन्होंने किराने का सामान खरीदने और रोजमर्रा के दूसरे खर्चों के दौरान मिले 10 रुपये के सिक्कों को अलग रखना शुरू किया। छोटी-छोटी रकम बचाने का यह सिलसिला तीन साल तक चलता रहा। शुरुआत में उन्होंने सोचा था कि जमा किए गए पैसों से घर के लिए कोई उपयोगी सामान खरीदेंगे। बाद में उन्होंने दोपहिया वाहन लेने का फैसला किया। उनके मुताबिक, हर लेनदेन में थोड़ी-थोड़ी बचत करके उन्होंने करीब 1,23,000 रुपये जमा किए।
परिवार ने किया मना, फिर भी नहीं छोड़ी बचत की आदत
जोसेफ की बचत की राह में मुश्किलें भी आईं। उस दौरान 10 रुपये के सिक्कों को बंद किए जाने या उनकी वैधता खत्म होने की अफवाहें सुनने को मिलीं। इससे परिवार के कुछ सदस्य भी उन्हें सिक्के जमा करना बंद करने की सलाह देने लगे। जोसेफ ने बताया कि परिवार के मना करने के बावजूद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी। उन्होंने एक-एक सिक्का संभालकर रखा और तीन साल बाद अपनी जमा रकम को वाहन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया।
शोरूम में दो घंटे तक गिने गए सिक्के
जब जोसेफ जमा किए हुए सिक्के लेकर लक्सेट्टिपेट स्थित जगदंबा होंडा मोटर्स के शोरूम पहुंचे, तो कर्मचारियों को रकम गिनने में करीब दो घंटे लगे। गिनती पूरी होने पर कुल राशि 1.23 लाख रुपये निकली। इसके बाद जोसेफ ने नई Honda Activa खरीदी। वाहन लेने के समय उनके परिवार के सदस्य भी उनके साथ मौजूद थे। जोसेफ ने बताया कि उनकी इच्छा रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने की भी थी, लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए वह इसे नहीं खरीद सके। हालांकि, तीन साल की बचत से स्कूटर खरीदने का उनका सपना पूरा हो गया। उनकी इस अनोखी कोशिश की चर्चा शोरूम के कर्मचारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी हो रही है।
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