ट्रेन के आरक्षित डिब्बे में यात्री का बैग चोरी होने के मामले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे को 1.45 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है। आयोग ने रेलवे की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सामान यात्री की निजी अभिरक्षा में था, इसलिए उसकी जिम्मेदारी रेलवे पर नहीं बनती। आयोग के मुताबिक, मामले में अहम सवाल यह था कि रेलवे ने आरक्षित कोच में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए थे या नहीं।
2014 में दिल्ली से पटना जाते समय हुई थी चोरी
अजय कुमार 7 जून 2014 को महानंदा एक्सप्रेस से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से पटना जा रहे थे। उनके मुताबिक, यात्रा के दौरान दो अज्ञात व्यक्ति आरक्षित डिब्बे में घुसे और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए। बैग में साड़ियां, कपड़े और गहने थे। यात्री ने सामान की कीमत 12 लाख रुपये बताई थी, जबकि मुआवजे से संबंधित आदेश में 1.20 लाख रुपये की राशि का उल्लेख है। अजय कुमार ने चोरी के बाद कोच के टीटीई से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की मांग की। रेलवे पुलिस बल (RPF) ने 7 सितंबर 2014 को चोरी की पुष्टि की, लेकिन FIR की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। बाद में भेजे गए एक पत्र में दावा किया गया कि उन्हें मोबाइल फोन पर जानकारी दी गई थी। कुमार ने कहा कि पत्र में दर्ज मोबाइल नंबर उनका नहीं था।
FIR दर्ज होने के दो साल बाद मामला अनसुलझा घोषित
मामले में 23 अप्रैल 2015 को FIR दर्ज की गई। इसके बाद 15 मई 2017 को जांच को अनसुलझा घोषित कर दिया गया। अजय कुमार ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया, जहां जिला आयोग ने रेलवे को 1.20 लाख रुपये पर 7 सितंबर 2017 से 9 फीसदी सालाना ब्याज देने के साथ 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। उत्तर रेलवे ने 16 अप्रैल 2024 को जिला आयोग के फैसले को दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी। रेलवे का तर्क था कि बैग यात्री के पास था और उसे रेलवे के पास जमा नहीं कराया गया था।
अनधिकृत प्रवेश रोकना रेलवे की जिम्मेदारी
राज्य आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी ने जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा। आयोग ने कहा कि केवल सामान यात्री के पास होने से रेलवे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। आयोग के अनुसार, मामले का मुख्य पहलू यह था कि आरक्षित डिब्बे में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए रेलवे ने पर्याप्त सावधानी बरती थी या नहीं। आयोग ने माना कि सुरक्षा व्यवस्था में कमी और बिना अनुमति लोगों के प्रवेश को रोकने में विफलता के कारण चोरी की घटना संभव हुई। इसी आधार पर रेलवे को मुआवजा देने का आदेश कायम रखा गया।
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