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वायु प्रदूषण से निपटने के लिए BS-3 वाहनों पर लगेगी रोक, प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार का मेगा प्लान

दिल्ली(Delhi Government) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ समिति ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की योजना सुझाई है। समिति ने भारत स्टेज (BS) के पुराने मानकों वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार, बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को तुरंत हटाने की बात कही गई है। वहीं, बीएस-4 वाहनों को 2030 तक और बीएस-6 दोपहिया तथा चारपहिया वाहनों को क्रमशः 2035 और 2040 तक हटाने का सुझाव दिया गया है।

समिति ने सुझाव दिया है कि 2026 की सर्दियों से दिल्ली-NCR में बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की प्रायोगिक शुरुआत की जाए। इसके बाद अगले वर्ष से इसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर विचार किया जा सकता है। ये सिफारिशें 18 अगस्त 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट का हिस्सा हैं।

पुराने वाहन प्रदूषण में कितना योगदान देते हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, NCR में लगभग 2.21 करोड़ सक्रिय और फिटनेस-स्वीकृत वाहन हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या करीब 3.6 लाख यानी केवल 1.6 प्रतिशत है। वहीं, लगभग 57 प्रतिशत वाहन बीएस-4 या उससे पुराने मानकों के हैं।

समिति के आंकड़ों के मुताबिक, बीएस-1 से बीएस-3 श्रेणी के वाहन कुल वाहनों का लगभग 30 प्रतिशत हैं, लेकिन पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) उत्सर्जन में उनका हिस्सा करीब 74 प्रतिशत है। इसके विपरीत, 41 प्रतिशत से अधिक बीएस-6 वाहनों का योगदान पीएम उत्सर्जन में लगभग सात प्रतिशत बताया गया है।

नए पेट्रोल-डीजल वाहनों की बिक्री पर भी प्रस्ताव

समिति ने निजी चारपहिया वाहनों की नई बिक्री में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन वाले वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य सुझाया है। इसके तहत 2027 में 20 प्रतिशत, 2028 में 45 प्रतिशत, 2029 में 70 प्रतिशत और 2030 में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रस्ताव है। वाहन कंपनियों को हर महीने अपनी कुल बिक्री और ऐसे वाहनों की बिक्री का ब्योरा देना होगा। लक्ष्य पूरे नहीं होने पर पेट्रोल-डीजल वाहनों के नए पंजीकरण पर सख्ती का सुझाव भी दिया गया है।

रिपोर्ट में वर्ष 2025 के दौरान दिल्ली-NCR में पंजीकृत लगभग 21.8 लाख नए वाहनों का भी विश्लेषण किया गया है। इनके पीएम उत्सर्जन में मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों की हिस्सेदारी 55.3 प्रतिशत, दोपहिया वाहनों की 15.6 प्रतिशत, यात्री तिपहिया वाहनों की 12.1 प्रतिशत और बसों की 8.1 प्रतिशत बताई गई है। इन सिफारिशों का उद्देश्य वाहन प्रदूषण घटाना और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए प्रस्तावों को अंतिम सरकारी निर्णय या लागू प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।

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