सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा समाप्त होने से जुड़े अपने मार्च 2026 के फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में खुली अदालत में सुनवाई कराने की मांग भी स्वीकार नहीं की।
बेंच ने कहा- फैसले में कोई कानूनी गलती नहीं
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि पुनर्विचार याचिका और 24 मार्च 2026 के फैसले का विस्तार से अध्ययन किया गया। अदालत को ऐसा कोई कानूनी आधार पर गलती नहीं मिली, जिसके कारण पहले दिए गए निर्णय में बदलाव की जरूरत हो। कोर्ट ने कहा कि इसलिए पुराने फैसले को यथावत रखा जाता है और पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है।
मार्च 2026 में हुआ था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने मार्च 2026 के फैसले में कहा कि अगर कोई व्यक्ति, जो अनुसूचित जाति से संबंधित है, हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका SC दर्जा समाप्त हो जाता है। अदालत ने कहा था कि ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति अनुसूचित जाति के लिए उपलब्ध आरक्षण, संवैधानिक लाभ और SC/ST अधिनियम के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
किन परिस्थितियों में दोबारा मिल सकता है SC दर्जा?
अदालत ने अपने पहले के फैसले में यह भी कहा था कि अगर कोई व्यक्ति बाद में फिर से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाता है, तो कुछ निर्धारित शर्तें पूरी होने पर उसका SC दर्जा बहाल किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि वह जन्म से अधिसूचित अनुसूचित जाति का सदस्य था, उसने वास्तव में हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापसी की है, पहले अपनाए गए धर्म को पूरी तरह छोड़ दिया है और उसकी मूल जाति के समुदाय ने उसे दोबारा स्वीकार कर लिया है।
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