भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार चालू वित्त वर्ष में भी लगातार मजबूत बनी हुई है। अक्टूबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत की तुलना में विकास दर में थोड़ी नरमी जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बनी हुई है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पूरे वर्ष के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि विश्व बैंक, ओईसीडी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
औद्योगिक उत्पादन और जीएसटी कलेक्शन में शानदार उछाल
देश के औद्योगिक और व्यावसायिक मोर्चे पर काफी सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन (IIP) में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 9 प्रतिशत बढ़ा। इसके साथ ही, सितंबर माह में आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में लगभग 15 प्रतिशत का उछाल आया है, जबकि बैंकों के कर्ज वितरण में 21.6 प्रतिशत की तेज वृद्धि से व्यावसायिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।
खाने-पीने की चीजें हुई महंगी
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच महंगाई आम आदमी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इससे पिछले महीने अगस्त में 4.83 प्रतिशत थी। इसके अलावा, खाद्य महंगाई भी बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई है, जिसका मुख्य कारण प्याज, चीनी, खाद्य तेल और चावल के दामों में आया उछाल है। मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है, जिससे आगामी दिनों में होम और कार लोन की ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है।
निर्यात में जबरदस्त तेजी और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का सुरक्षा कवच
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सितंबर 2026 में भारत के कुल वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वस्तुओं के निर्यात का हिस्सा 23.1 प्रतिशत रहा। इसके साथ ही, 16 अक्टूबर 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश की लगभग 10.3 महीने की आयात आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, जो बाहरी आर्थिक झटकों से अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करता है।
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