अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन के लिए भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश का सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) घटकर महज 282.7 मिलियन बैरल रह गया है। यह अक्टूबर 1982 के बाद यानी पिछले 44 सालों में अमेरिकी तेल भंडार का सबसे निचला स्तर है। खाड़ी क्षेत्र में जारी ऊर्जा अनिश्चितता के कारण 172 मिलियन बैरल आपातकालीन तेल जारी करने से यह अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई है, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नींद उड़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल जारी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 110.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो 20 मई के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 100 डॉलर और मर्बन क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। तेल महंगा होने से अमेरिका में महंगाई दर और पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
समुद्र से लेकर जमीन तक हूती हमलों का तांडव
तेल संकट और महंगाई के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हो रहे हमले प्रमुख वजह हैं। शिपिंग फर्म केप्लर के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में कम से कम 18 तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यानबू में अरामको प्लांट और शायबाह ऑयल साइट पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा, यमन के शबवा प्रांत में सुरक्षा बलों के कैंप पर हुए हूती हमले में 58 लोगों की जान चली गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है।
रूस पर प्रतिबंध और विशेषज्ञों की चिंता
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की इस उथल-पुथल के बीच आईएनजी (ING) के विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाजार में जोखिम काफी बढ़ गया है और फिलहाल इसके कम होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने से जुड़ा कार्यकारी आदेश तो जारी किया है, लेकिन विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बताया कि सितंबर में रूस का तेल उत्पादन थोड़ा बढ़कर 8.43 मिलियन बैरल प्रति दिन जरूर हुआ, लेकिन बाजार का ध्यान अब भी मध्य पूर्व के संकट पर ही केंद्रित है।
READ MORE: रोहित-विराट के बाद अब Gen Z का राज, करोड़पति बनने वाले इन युवा क्रिकेटर्स ने बदल दी भारतीय टीम की तस्वीर!