पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक नाबालिग के जन्म प्रमाण पत्र पर उसके बायोलॉजिकल पिता का नाम बदलकर उसकी माँ के दूसरे पति का नाम दर्ज करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बाद में हुई दूसरी शादी से जन्म के समय दर्ज माता-पिता का विवरण नहीं बदला जा सकता।
याचिका में अधिकारियों से यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि 25 अप्रैल, 2022 को जारी जन्म प्रमाण पत्र में बच्चे के पिता के तौर पर जगजीत सिंह का नाम हटाकर बलविंदर कुमार का नाम दर्ज किया जाए। यह याचिका तब दायर की गई थी जब बच्चे की माँ ने बलविंदर कुमार से दूसरी शादी कर ली और बच्चे के पिता के तौर पर उनका नाम दर्ज कराने की मांग की।
माता-पिता की दूसरी शादी होने से तथ्य नहीं बदलते
हाई कोर्ट ने ‘पूजा गोयल बनाम हरियाणा सरकार और अन्य’ मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला दिया, जिसमें इसी तरह के मुद्दे पर विचार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र बच्चे के जन्म और माता-पिता के विवरण का एक कानूनी रिकॉर्ड होता है। बायोलॉजिकल माता-पिता की शादी टूटने या किसी एक माता-पिता की दूसरी शादी होने से ये तथ्य अपने आप नहीं बदलते।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवार के ढांचे में बाद में हुए बदलावों के कारण जन्म के समय दर्ज माता-पिता के विवरण को बदला नहीं जा सकता। इसलिए, कोर्ट को जन्म प्रमाण पत्र पर पिता का नाम बदलने की मांग वाली याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं मिला।
यह फैसला बच्चे के कानूनी जन्म रिकॉर्ड और परिवार की परिस्थितियों में बाद में हुए बदलावों के बीच अंतर करता है और कहता है कि केवल दूसरी शादी से जन्म के समय दर्ज माता-पिता का विवरण नहीं बदला जा सकता।
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