कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा उठाए गए कड़े कदमों और 47 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, रेलवे और DMRC को कारण बताओ और अवमानना का नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
सामान्य रहेंगी ट्रेन और मेट्रो सेवाएं
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को पांच अहम निर्देश जारी करते हुए आदेश दिया है कि मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित की जाएंगी। जब तक अनुच्छेद 19(2) के तहत पब्लिक आर्डर में गड़बड़ी को रोकने के लिए कानूनी रूप से जरूरी न हो, आवाजाही बाधित नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, देश की राजधानी में इंटरनेट सेवाएं भी बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
बैरिकेडिंग और ट्रैफिक नियमों की होगी समीक्षा
शहर में लोगों की आवाजाही को लेकर कोर्ट ने कहा है कि ट्रैफिक नियमों के दायरे में आम नागरिकों की गतिशीलता पर कोई रोक नहीं होगी। कानून-व्यवस्था की आड़ में सड़कों पर लगाए गए बैरिकेड्स के फैसलों की तत्काल समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लगाए गए धारा 163 से जुड़े बोर्ड या बाधाओं को तुरंत हटाने को कहा गया है ताकि लोगों को अदालत तक पहुंचने में कोई डर या परेशानी न हो।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सख्ती नहीं
अदालत ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि बिना हथियार के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने वाले और उन इलाकों के लोगों को हिरासत में न लिया जाए जहां धारा 163 लागू नहीं है। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया है कि बिना नेम-बैज या पहचान के पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
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