Police Commemoration Day: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पहुंचकर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने बाइक रैली को भी हरी झंडी दिखाई।
आजादी से अब तक बलिदान की गाथा
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश आज उन बहादुर पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट हुआ है, जिन्होंने आजादी के समय से लेकर अब तक राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के करीब आठ दशकों में भारत वैश्विक मंच पर सम्मानजनक स्थान तक पहुंचा है और इस उपलब्धि की नींव में हमारे जवानों का बलिदान है।
आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में योगदान
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि अगर बहादुर पुरुषों और महिलाओं ने आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान नहीं दिया होता तो आज भारत कहां खड़ा होता। उन्होंने शहीद जवानों के त्याग को देश की प्रगति की अहम आधारशिला बताया।
नक्सलवाद का खात्मा बताया ऐतिहासिक पड़ाव
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय पुलिस के लिए बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके मुताबिक, 31 मार्च 2026 को देश नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हो गया। उन्होंने कहा कि 1981 से नक्सलवाद ने देश के कई जिलों को गहरे घाव दिए और इस दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों तथा आम नागरिकों की जान गई।
13,700 से ज्यादा नागरिकों की मौत का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के कारण सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। उनके मुताबिक, नक्सलवाद की वजह से 13,700 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान गई, जबकि 3,600 बहादुर सुरक्षाकर्मियों ने देश के लिए बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि इन जवानों के त्याग ने करीब पांच दशक पुरानी इस समस्या से देश को उबरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अमित शाह ने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति राष्ट्र की ओर से आभार जताया।
21 अक्टूबर का हॉट स्प्रिंग से कनेक्शन
‘नेशनल पुलिस स्मरण दिवस परेड’ में अमित शाह ने बताया कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के दुर्गम हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में CRPF के 10 जवानों ने चीनी सेना के हमले का बहादुरी से सामना करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए थे। उन्होंने कहा कि ऊंची पहाड़ियों पर संघर्ष का परिणाम कठिन परिस्थितियों में भी लगभग तय था, लेकिन जवानों ने देश की एक इंच जमीन भी विदेशी हाथों में न जाने देने के संकल्प के साथ अपना अमर बलिदान दिया। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
36,852 शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि
गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया था। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के पुलिसकर्मियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुलिस स्मारक अब देशभर के नागरिकों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन चुका है।
154 नए नाम हुए शामिल
अमित शाह के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अब तक 36,852 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर श्रद्धांजलि दी जाती रही है। इस वर्ष 154 और बहादुर जवानों के नाम इस सूची में जोड़े गए हैं। शहीदों के नामों का जिक्र किए जाने के बाद गृह मंत्री ने हाथ जोड़कर उन्हें नमन किया और उनके बलिदान के प्रति देश की कृतज्ञता व्यक्त की।
पुलिसकर्मियों के लिए हर दिन राष्ट्रसेवा
अमित शाह ने कहा कि सरकार की सेवाओं में पुलिस की नौकरी सबसे कठिन सेवाओं में से एक है। देश के नागरिक अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता। जिस समय लोग परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं, उस समय पुलिस जवान आंतरिक सुरक्षा, यातायात और लोगों की सलामती की जिम्मेदारी संभाल रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन के स्वर्णिम समय को परिवार से दूर रहकर राष्ट्र को समर्पित करना बहुत बड़ी सेवा है।
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