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Dussehra 2026: दशहरे पर क्यों की जाती है शमी के पेड़ की पूजा? महाभारत में छिपा है इसका खास कनेक्शन

Dussehra 2026: आज देशभर में बड़ी धूमधाम के साथ दशहरा मनाया जा रहा है। दशहरे यानी विजयादशमी के दिन रावण दहन, रामलीला और पूजा-पाठ के साथ कई जगहों पर शमी के पेड़ की पूजा करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं में शमी को बेहद शुभ माना गया है। इस दिन लोग शमी के पत्ते एक-दूसरे को देते हैं, बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

भगवान राम और विजय से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान राम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था। शमी की पूजा को भी इसी विजय और शुभ शुरुआत की भावना से जोड़ा जाता है। हालांकि, भगवान राम और शमी के पेड़ से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में प्रचलित हैं।

शमी को माना जाता है साहस और सफलता का प्रतीक

दशहरे पर शमी की पूजा करते समय लोग प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन की परेशानियां दूर हों और उन्हें कार्यों में सफलता मिले। धार्मिक परंपराओं में शमी केवल पूजा का पेड़ नहीं है, बल्कि इसे साहस, शुभता और विजय का प्रतीक भी माना जाता है। यही वजह है कि विजयादशमी के दिन इसकी पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

महाभारत में अर्जुन से जुड़ी है शमी की कथा

शमी के पेड़ का संबंध महाभारत की एक प्रसिद्ध कथा से भी बताया जाता है। मान्यता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने अपने हथियार शमी के पेड़ में छिपा दिए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने इसी पेड़ से अपने हथियार निकाले और युद्ध के लिए तैयार हुए। इसी कथा के कारण शमी को शक्ति, साहस और विजय से जोड़कर देखा जाता है।

चुनौतियों से लड़ने का देता है संदेश

शमी पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यता का एक अर्थ यह भी है कि व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों में हिम्मत और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। जिस तरह अर्जुन ने कठिन समय में अपने अस्त्र सुरक्षित रखे और सही समय आने पर उनका इस्तेमाल किया, उसी तरह शमी को धैर्य, शक्ति और विजय की भावना से जोड़ा जाता है।

शमी के पत्तों को क्यों कहते हैं ‘सोना’?

महाराष्ट्र समेत देश के कुछ हिस्सों में दशहरे पर शमी के पत्ते एक-दूसरे को देने की परंपरा है। कई जगह इन्हें प्रतीकात्मक रूप से ‘सोना’ कहा जाता है। लोग रिश्तेदारों, दोस्तों और बड़ों को शमी के पत्ते देकर शुभकामनाएं देते हैं। इसका संबंध समृद्धि, खुशहाली और रिश्तों में मिठास की कामना से है। यहां ‘सोना’ कहने का अर्थ पत्तों का वास्तव में सोने के बराबर होना नहीं, बल्कि उन्हें शुभकामना और सम्मान का प्रतीक मानना है।

दशहरे पर कैसे करें शमी की पूजा?

अगर घर के पास शमी का पेड़ मौजूद है, तो विजयादशमी के दिन उसकी साफ-सफाई करके श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। पेड़ के पास दीपक जलाकर जल अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा के दौरान पेड़ को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और जरूरत के अनुसार ही उसके पत्ते लेने चाहिए।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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