उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर अब सात समंदर पार फ्रांस में भी दंगाइयों और उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाने लगा है। फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में हुए हालिया हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि देश में तोड़फोड़, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को अपने कृत्यों की भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने राज्य की व्यवस्था को कमतर आंकने या गिराने की कोशिश की है, उन्हें इस नुकसान की भरपाई खुद ही करनी होगी।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक
टेलीविजन के जरिए राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने देशव्यापी हिंसा की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने साफ किया कि जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले नागरिकों को उन उपद्रवियों और दंगा करने वालों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए जिन्होंने आगजनी और लूटपाट की है। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार उन तमाम पुलिसकर्मियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों के साथ मजबूती से खड़ी है जो इस हिंसा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। साथ ही, स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू एक खास संकट प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता करेंगे ताकि पीड़ितों को फौरी राहत दी जा सके।
पेरिस में भयानक अराजकता और भारी तबाही
बीते 17 अक्टूबर का दिन फ्रांस और विशेषकर पेरिस के लिए बेहद खौफनाक और शर्मनाक रहा। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश भर में हुए इन विरोध प्रदर्शनों में लगभग 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, जिसमें किसान, पर्यावरण कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन के सदस्य और छात्र शामिल थे। शुरुआत में यह प्रदर्शन महंगाई, ईंधन के बढ़ते दामों, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित था, लेकिन देखते ही देखते इसने हिंसक रूप ले लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन झड़पों के दौरान कुल 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 997 पुलिसकर्मी व सुरक्षाकर्मी घायल हो गए जिनमें से 7 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
छात्रों की चिंताओं पर संवाद और भविष्य की तैयारी
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्वीकार किया कि हाल के दिनों में छात्रों और युवाओं द्वारा उठाई गई चिंताएं और महंगाई-ईंधन के बढ़ते दाम इस असंतोष की बड़ी वजह हैं। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और व्यवसायिक संगठनों के साथ बैठकर बातचीत करेगी ताकि जनता पर बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सके। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि 17 अक्टूबर के इस बवाल से सबक लेते हुए खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता तैयारियां रखी जाएं।
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