संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय (UNCTAD) ने अपनी ताजा व्यापार और विकास रिपोर्ट में दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। पश्चिम एशिया में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण उपजे ऊर्जा संकट के चलते वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर सुस्त पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पिछले साल दर्ज की गई 2.9 प्रतिशत से गिरकर वर्ष 2026 में मात्र 2.6 प्रतिशत रह जाएगी।
संकट के बावजूद भारत की मजबूत रफ्तार
वैश्विक स्तर पर जारी भारी उथल-पुथल और महंगे तेल-ऊर्जा संकट के बावजूद भारत दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। UNCTAD का अनुमान है कि 2026 में दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में अकेले एशिया महाद्वीप का योगदान 59 प्रतिशत रहेगा। इस दौरान भारत 7.3 प्रतिशत की सबसे तेज विकास दर के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा। वहीं दूसरी ओर, चीन के 4.5 प्रतिशत और इंडोनेशिया के 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना जताई गई है।
अमेरिका और चीन के बीच बदला व्यापार समीकरण
रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक व्यापार के बदलते स्वरूप को भी रेखांकित किया गया है। वर्ष 2024 के बाद से अमेरिका और चीन के बीच आपसी व्यापार में 20 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पूर्वी एशियाई देशों ने चीन और उत्तरी अमेरिका दोनों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों का विस्तार किया है। हालांकि, निर्यात नियंत्रणों और कड़े नियमों के कारण नई कंपनियों के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में प्रवेश करना काफी जटिल हो गया है।
एआई और सेमीकंडक्टर से पैदा हुआ नया जोखिम
ऊर्जा संकट और व्यापारिक तनाव के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उत्पाद वैश्विक व्यापार को तेजी से गति दे रहे हैं। हालांकि एजेंसी ने आगाह किया है कि केवल AI आधारित व्यापार बढ़ने से सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास होना अनिवार्य नहीं है। बाजार में चुनिंदा कंपनियों का दबदबा बढ़ने से भविष्य में वित्तीय स्थिरता को लेकर बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।
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