रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने की अमेरिकी योजना अब अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर रैंड पॉल ने प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत जैसे अहम रणनीतिक साझेदार पर इतना भारी टैरिफ लगाना अमेरिका के हित में नहीं होगा।
रैंड पॉल ने इसे ‘अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा’ कदम बताया। उनका कहना है कि अमेरिका एक तरफ चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहता है, जबकि दूसरी ओर भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी जा रही है। इससे दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंच सकता है।
भारत के रूस और चीन के करीब जाने का खतरा
सीनेटर रैंड पॉल ने आशंका जताई कि अगर अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लागू करता है, तो इसका उल्टा असर हो सकता है। भारत रूस और चीन के और करीब जा सकता है, जो अमेरिका की वैश्विक रणनीति के उलट होगा। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की व्यापारिक पाबंदियां केवल भारत को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबार पर भी इसका असर पड़ सकता है।
क्या है अमेरिका का प्रस्तावित बिल?
अमेरिकी सीनेट ने रूस की ऊर्जा आय को निशाना बनाने के लक्ष्य से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं। संभावित कार्रवाई के दायरे में भारत और चीन जैसे रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार भी आ सकते हैं। विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके सहयोगियों, ओलिगार्क्स और वित्तीय संस्थानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
अमेरिका में टैरिफ को लेकर मतभेद
इस विधेयक को लेकर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी सामने आ रहे हैं। कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने चिंता जताई है कि इससे राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने की बहुत व्यापक शक्तियां मिल सकती हैं और इसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाना है। वहां इस पर चर्चा और मतदान होना बाकी है।
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