Bangladesh Hindu Family Murder Case: बांग्लादेश के रंगपुर में एक हिंदू परिवार के चार सदस्यों की नृशंस हत्या के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की जांच और मामले को लेकर सामने आए अलग-अलग बयानों पर संदेह जताते हुए रंगपुर सिटी सिविक सोसाइटी ने पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
बंद घर से मिले चार शव
22 अगस्त को रंगपुर में एक बंद मकान से सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गनपति चक्रवर्ती (65), उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती (50) और उनके बच्चों आगामी चक्रवर्ती प्रार्थी (23) और प्रियम चक्रवर्ती (12) के सड़े-गले शव बरामद हुए थे। इस घटना के बाद इलाके में भी आक्रोश और चिंता का माहौल है।
दो चचेरे भाइयों की गिरफ्तारी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुग्धो और सिद्धार्थ नाम के दो चचेरे भाइयों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस की ओर से घटना को लेकर दिए गए बयानों पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले मानवाधिकार संगठन ‘आइन ओ शालिश केंद्र’ और ‘हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ भी पुलिस के बयानों पर सवाल उठा चुके हैं।
पुलिस के बयानों में बदलाव पर सवाल
शनिवार को रंगपुर सिटी सिविक सोसाइटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि दो संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी से लोगों के मन में कई सवाल और संदेह पैदा हुए हैं। संगठन के मुताबिक, यह स्थिति पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच अविश्वास को दर्शाती है।
पहली ब्रीफिंग में बताई गई थी अलग जगह
सिविक सोसाइटी के अनुसार, 23 अगस्त को पुलिस की पहली ब्रीफिंग में बताया गया था कि गनपति चक्रवर्ती की हत्या उनके घर की छत पर हुई थी। वहीं, उनकी पत्नी और बेटी की हत्या दूसरी मंजिल की सीढ़ियों पर होने की बात कही गई थी। पुलिस ने यह भी बताया था कि उनके बेटे की हत्या घर के अंदर सोते समय की गई।
27 अगस्त को बदला घटनास्थल का दावा
इसके बाद 27 अगस्त को हुई दूसरी पुलिस ब्रीफिंग में घटनास्थल को लेकर अलग जानकारी सामने आई। इसमें कहा गया कि गनपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी और उनकी बेटी तीनों की हत्या खुली छत पर की गई थी। पुलिस के बयानों में इस बदलाव ने मामले की जांच को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पारदर्शी जांच की मांग
रंगपुर सिटी सिविक सोसाइटी ने कहा कि पुलिस के बयानों में आई इस विसंगति और पारदर्शिता की कमी को दूर करने के लिए हत्याकांड की निष्पक्ष न्यायिक जांच जरूरी है। नागरिक समाज का जोर इस बात पर है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो, ताकि मृतकों के परिवार और आम लोगों के बीच पैदा हुए संदेह को दूर किया जा सके।
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