पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग तेज हो गई है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटिश अखबार ‘डेली मेल’ में एक विशेष लेख लिखकर इमरान खान का खुलकर समर्थन किया है। जॉनसन ने कहा है कि इमरान खान इस समय पाकिस्तान की एक बेहद छोटी जेल कोठरी में बंद हैं, जहां उन्हें व्यायाम करने और पढ़ने की सामग्री जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सीमित अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपनी कूटनीतिक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल कर इमरान खान को जेल से बाहर निकालने में मदद करने की अपील की है।
Cricket legend Imran Khan is rotting to death in a tiny jail cell in Pakistan. It's time Britain used its influence to help free himhttps://t.co/Yf5eCx2fAi
— Boris Johnson (@BorisJohnson) September 18, 2026
सेना का विरोध और राजनीतिक रूप से प्रेरित मामले
बोरिस जॉनसन ने अपने लेख में इमरान खान के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान पर लगाए गए ज्यादातर मुकदमे राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। जॉनसन के अनुसार, इन मामलों के पीछे की मुख्य वजह कोई भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना के सीधे दखल का विरोध करना है। इमरान खान सैन्य प्रभाव के खिलाफ मुखर रहे हैं, इसी कारण उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
सत्ता में वापसी का डर और ब्रिटेन की भूमिका
अपने लेख में जॉनसन ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना को इस बात का गहरा डर है कि यदि इमरान खान जेल से रिहा होते हैं, तो वे अपनी भारी लोकप्रियता के बल पर दोबारा सत्ता में लौट सकते हैं। इसी डर के कारण उन्हें जेल में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। जॉनसन ने जोर देकर कहा कि ब्रिटेन को अपने अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का इस्तेमाल करके पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए और इमरान की रिहाई में मदद करनी चाहिए।
नीतिगत मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत समर्थन
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे इमरान खान को व्यक्तिगत रूप से पसंद करते हैं, लेकिन कुछ विदेशी नीतियों पर दोनों के विचार अलग रहे हैं। जॉनसन ने कहा कि वे रूस, तालिबान और अमेरिका को लेकर इमरान खान की नीतिगत सोच से पूरी तरह सहमत नहीं थे। इसके बावजूद, एक स्वतंत्र नेता के साथ हो रहे मानवाधिकारों के हनन और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ आवाज़ उठाना जरूरी है।
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