अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कूटनीतिक जवाब सामने आया है। ब्रिटिश राजनयिक सर हेराल्ड निकोलसन के उस कथन को चरितार्थ करते हुए कि ‘कूटनीति में वार तलवार से नहीं, शब्दों से होता है’, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आज का भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब किसी के दबाव में रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कड़ा संदेश दिया कि भारत वैश्विक स्तर पर अपने नए बाजार और व्यापारिक रास्ते बना रहा है।
तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम और छोटे शहरों की ताकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह सफलता केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब देश के लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकल रहे हैं। छोटे शहरों के युवा अब केवल रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि खुद कंपनियां खड़ी करके रोजगार पैदा करने वाले उद्यमी बन रहे हैं।
40 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बने नए वैश्विक अवसर
अमेरिकी बाजार पर निर्भरता के बजाय विकल्पों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत ने बीते कुछ वर्षों में लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं। इन करारों ने भारतीय उद्यमियों के लिए नई वैश्विक साझेदारियों और नए बाजारों के द्वार खोले हैं। यह नीति स्पष्ट करती है कि यदि कोई एक देश भारत के लिए अपने दरवाजे बंद करने का प्रयास करता है, तो भारतीय युवाओं और व्यवसायियों के लिए दुनिया के अन्य बड़े बाजार पहले से तैयार हैं।
युवा प्रतिभा और पर्यावरण के मोर्चे पर वैश्विक उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय युवाओं के कौशल और प्रतिभा ने वैश्विक स्तर पर गहरा विश्वास कायम किया है। पहले जहां भारत को केवल सस्ते श्रम का स्रोत माना जाता था, वहीं आज भारतीय नवप्रवर्तक दुनिया को बौद्धिक नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, टिकाऊ विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत G-20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल किया है। पिछले 12 वर्षों में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा पर दिए गए जोर के कारण आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।
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