नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आए अचानक सैलाब (फ्लैश फ्लड) की वजह से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा(Nepal Flood) में अब तक 675 लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। खराब मौसम के कारण राहत और बचाव कार्यों में लगातार रुकावट आ रही है। इसके अलावा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है जबकि सुनकोशी नदी का जलस्तर भी चेतावनी के निशान को पार कर चुका है।
नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत लगातार मदद का हाथ बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में भारत ने राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है। 11 टन वजनी इस राहत सामग्री के साथ एक C-130 सैन्य विमान नेपाल के लिए रवाना किया गया है। इस खेप में विशेष सर्च और रेस्क्यू उपकरण, तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ-साथ डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।
भारतीयों की सुरक्षित वापसी
इस आपदा के बीच नेपाल और चीन की सीमा पर फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने का काम तेजी से जारी है। विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों में 598 भारतीय नागरिक चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं जबकि चीन की तरफ मौजूद करीब 900 भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं।
राहत की बात यह है कि नेपाल में फंसे नागपुर के 105 नागरिक रविवार सुबह पटना-पूर्णा एक्सप्रेस के जरिए अपने घर नागपुर पहुंच गए हैं। अपनों को सुरक्षित वापस पाकर परिजनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। यात्रियों ने इस सफल वापसी के लिए प्रशासन और सरकार का आभार जताया है। हालांकि, अब भी कुछ भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबरें हैं जिनकी तलाश जारी है।