FSSAI Tea Leaves: देश में चाय पीने वालों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चायपत्ती में मौजूद कीटनाशकों के अवशेष की अधिकतम सीमा यानी मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट (MRL) तय करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य चाय की गुणवत्ता और सुरक्षा को मजबूत करना व उपभोक्ताओं को संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
चाय के पौधों पर क्यों किया जाता है कीटनाशकों का इस्तेमाल?
चाय के बागानों में दीमक समेत कई तरह के कीट पौधों और उनकी पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। फसल को इनसे बचाने के लिए किसान एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड जैसे कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। प्रसंस्करण के बाद भी इन रसायनों के कुछ अवशेष पत्तियों में रह सकते हैं। इन्हीं अवशेषों की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए अधिकतम सीमा तय करने की जरूरत पड़ती है।
एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड की कितनी होगी सीमा?
प्रस्ताव के तहत FSSAI ने चाय में एसिटामिप्रिड के लिए 20 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 20 पीपीएम और इमिडाक्लोप्रिड के लिए 50 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम यानी 50 पीपीएम की अधिकतम अवशेष सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन मानकों को वैज्ञानिक जोखिम आकलन, भारतीय आहार पैटर्न और उपलब्ध अवशेष संबंधी आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
MRL आखिर होता क्या है?
MRL किसी खाद्य पदार्थ में मौजूद किसी कीटनाशक के उस अधिकतम अवशेष स्तर को कहा जाता है, जिसे कानून के तहत स्वीकार्य माना जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य परिस्थितियों में उस खाद्य पदार्थ का सेवन करने से उपभोक्ता को कीटनाशक अवशेषों के कारण अस्वीकार्य स्वास्थ्य जोखिम न हो।
36 नमूनों की जांच में 28 में मिले कीटनाशक
हाल ही में देश में ब्लैक टी के 36 नमूनों की जांच की गई थी। इनमें से 28 नमूनों में 11 अलग-अलग तरह के कीटनाशक पाए गए। हालांकि, इन नमूनों में मिले कीटनाशकों की सटीक मात्रा की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में केवल किसी अवशेष की मौजूदगी का पता चलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि चाय स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित है, इसके लिए उसकी मात्रा और संबंधित निर्धारित सीमा अहम होती है।
क्या बाजार की चाय जहरीली है?
FSSAI के इस प्रस्ताव का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बाजार में बिक रही चाय जहरीली है या उसे पीना असुरक्षित है। इसे खाद्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित MRL का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाय में मौजूद कीटनाशक अवशेषों पर वैज्ञानिक आधार पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गुणवत्ता मानकों की निगरानी मजबूत हो।
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