Parivartini Ekadashi 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल एकादशी तिथि 21 सितंबर, सोमवार को रात 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को रात 9:43 बजे तक रहेगी। हालांकि व्रत के लिए उदयातिथि देखी जाती है। 21 सितंबर को सूर्योदय दशमी तिथि में होगा और एकादशी तिथि का सूर्योदय 22 सितंबर को सुबह 06:09 बजे होगा। इसलिए परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा और इसी दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी।
ब्रह्म मुहूर्त में करें व्रत का संकल्प
22 सितंबर को व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 04:35 बजे से 05:22 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत और पूजा का संकल्प कर सकते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा सुबह 06:09 बजे से 07:06 बजे के बीच करना शुभ रहेगा।
पूजा के लिए दोपहर तक भी शुभ समय
सुबह के पहले समय के अलावा भगवान विष्णु की पूजा सुबह 09:11 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक भी की जा सकती है। इस दौरान लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा। वहीं एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक होगा।
एकादशी पर बनेंगे दो शुभ योग
परिवर्तिनी एकादशी पर दो शुभ योग बनने वाले हैं। सुबह रवि योग रहेगा, जबकि शाम को सुकर्मा योग का निर्माण होगा। रवि योग सुबह 06:09 बजे से 07:06 बजे तक रहेगा। वहीं अतिगण्ड योग प्रात:काल से शाम 04:29 बजे तक रहेगा और इसके बाद सुकर्मा योग शुरू होगा।
उत्तराषाढ़ा के बाद रहेगा श्रवण नक्षत्र
इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 07:06 बजे तक रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा। ऐसे में एकादशी के दिन पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंचांग में बताए गए शुभ समय का ध्यान रखा जा सकता है।
एकादशी पर पाताल लोक में रहेगी भद्रा
22 सितंबर को भद्रा काल भी रहेगा। भद्रा सुबह 08:55 बजे से शुरू होकर रात 09:43 बजे तक रहेगी। पंचांग के अनुसार इस दौरान भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। इसलिए इस भद्रा के कारण पूजा-पाठ में कोई बाधा नहीं होगी।
23 सितंबर को होगा व्रत का पारण
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अगले दिन यानी 23 सितंबर को पारण करना होगा। पारण सुबह 06:10 बजे के बाद किया जा सकता है और इसे सुबह 08:35 बजे से पहले कर लेना चाहिए। उस दिन द्वादशी तिथि रात 10:50 बजे समाप्त होगी।
भगवान विष्णु के करवट बदलने से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा के दौरान अपनी करवट बदलते हैं। इस वजह से इस एकादशी को खास महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और पूजा करने वाले भक्तों को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है और उनके पाप नष्ट होते हैं। श्रीहरि की कृपा से जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति होने की भी मान्यता है।
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