Trump Tariff: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने मंगलवार को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को आगे बढ़ाने के पक्ष में 214-211 से मतदान किया। यह एक अहम प्रक्रियात्मक मंजूरी है, जबकि बिल पर अंतिम वोटिंग अभी बाकी है। प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत और चीन पर नजर
इस प्रस्ताव के संभावित असर में भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार शामिल हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 100% टैरिफ अभी भारत पर लगाया नहीं गया है। फिलहाल बात उस कानूनी अधिकार की है, जो बिल पारित होने की स्थिति में राष्ट्रपति को मिल सकता है।
214-211 से मिली मंजूरी
हाउस में बिल को आगे बढ़ाने वाली प्रक्रिया 214 वोट के मुकाबले 211 वोट से पार हुई। रिपोर्टों के मुताबिक दो डेमोक्रेट सांसदों ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ मिलकर इसका समर्थन किया। वहीं, कुछ वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति को मिलने वाली व्यापक टैरिफ शक्तियों को लेकर आपत्ति जताई है।
आज हो सकती है फाइनल वोटिंग
हाउस में बिल पर अंतिम वोटिंग बुधवार को होने की उम्मीद है। अगर यह सदन से पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही यह कानून का रूप ले सकेगा। इसलिए फिलहाल भारत पर 100% अतिरिक्त शुल्क लागू होने की स्थिति नहीं बनी है।
सीनेट पहले ही कर चुका पास
अमेरिकी सीनेट 7 अगस्त को इस बिल को 86-11 के वोट से पारित कर चुका है। आधिकारिक अमेरिकी रिकॉर्ड के मुताबिक यह मतदान H.R. 5334 के तहत हुआ था। बिल में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के साथ ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं।
रूस के तेल और गैस खरीदार निशाने पर
बिल के प्रावधान राष्ट्रपति को रूसी मूल के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े आयातकों पर 100% तक लक्षित शुल्क लगाने की शक्ति दे सकते हैं। सीनेट संस्करण में रूसी ऊर्जा के शीर्ष पांच आयातक देशों को लेकर प्रावधान है। हाउस में चर्चा के दौरान भारत समेत कुछ देशों को संभावित रूप से प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
रूस की ‘शैडो फ्लीट’ पर भी कार्रवाई
बिल में रूस के ‘शैडो फ्लीट’ पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान है। इसके तहत उन जहाजों और विदेशी पक्षों को निशाना बनाया जा सकता है, जिन पर रूस को मौजूदा तेल प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। इसके अलावा रूस के अधिकारियों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
भारत के लिए क्यों अहम है मामला?
भारत लंबे समय से रूसी तेल का बड़ा खरीदार रहा है। ऐसे में अगर यह कानून अंतिम रूप से पारित होता है और राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल भारत पर करते हैं, तो अमेरिका को भारतीय उत्पादों पर भारी अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, कब और किन देशों पर इस अधिकार का इस्तेमाल होगा, यह अभी तय नहीं है।
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