दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार (28 जुलाई) को हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह भी तय होना चाहिए कि अगर कहीं गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
CJI ने हिंसा के पीछे बताए दो संभावित कारण
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन बाद में हिंसा कैसे हुई, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे दो वजहें हो सकती हैं। पहली, पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया हो, और दूसरी, प्रदर्शनकारियों के बीच ऐसे लोग शामिल हो गए हों जिन्होंने जानबूझकर हिंसा भड़काई हो।
आठ राज्यों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और गुजरात समेत आठ राज्यों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि याचिकाओं में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार का मुद्दा उठाया गया है, साथ ही पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल से लोगों और मीडिया कर्मियों के घायल होने का भी जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच जारी रख सकती है, लेकिन फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
सुनवाई में बिहार और जुनैद का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान एक वकील ने बिहार में प्रदर्शन के दौरान नाबालिगों को हिरासत में लेने का मुद्दा उठाया। उनका दावा था कि 13 वर्ष तक के बच्चों को भी हिरासत में लिया गया। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जुनैद से जुड़े मामले का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह अलग मामला है।
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