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जमीन के नीचे छुपी है कलियुग की जड़ी-बूटी! कभी देखी है नीली हल्दी? जोड़ों के दर्द से लेकर इम्यूनिटी तक… हर बीमारी को शरीर से लेती है निचोड़

Blue Turmeric Benefits : जब भी कोई हल्दी का नाम सुनता है तो दिमाग में पीले या सुनहरे रंग की हल्दी की तस्वीर ही सामने नजर आती है, लेकिन शायद ही आपने कभी सुना हो या देखा हो कि, प्रकृति में एक ऐसी दुर्लभ हल्दी भी पाई जाती है, जो अंदर से गहरे नीले, हरे या बैंगनी रंग की दिखाई देती है। इसे नीली हल्दी कहा जाता है। वैज्ञानिक रूप से इसका नाम ‘Curcuma caesia’ है। दक्षिण एशिया और खासकर भारत के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली ये हल्दी की प्रजाति अपने औषधीय गुणों और कम उपलब्धता के कारण खास मानी जाती है।

काटने पर दिखता है अनोखा नीला रंग

नीली हल्दी बाहर से देखने पर भूरी या कत्थई रंग की हो सकती है, लेकिन इसे काटने पर इसका अंदरूनी हिस्सा गहरे नीले, हरे या बैंगनी रंग का दिखाई देता है। आम पीली हल्दी की तुलना में इसकी उपलब्धता काफी कम है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से जोड़ों के दर्द और औषधीय लेप जैसी जरूरतों में किया जाता रहा है।

क्यों कहा जाता है इसे ब्लू गोल्ड?

नीली हल्दी को ‘ब्लू गोल्ड’ यानी नीला सोना भी कहा जाता है। इसकी वजह इसकी दुर्लभता, सीमित पैदावार और बाजार में कम उपलब्धता है। इसकी खेती पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में की जाती है, जिसके कारण यह आम पीली हल्दी की तरह हर बाजार में आसानी से नहीं मिलती। कम उत्पादन और मांग के कारण इसकी कीमत भी सामान्य हल्दी से अधिक हो सकती है।

एसेंशियल ऑयल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

नीली हल्दी में एसेंशियल ऑयल्स, कपूर और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसमें मौजूद विभिन्न बायोएक्टिव कंपाउंड्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इसे पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी माना जाता है। आयुर्वेद में इसे जोड़ों के दर्द, सूजन और शरीर से जुड़ी कई समस्याओं में इस्तेमाल किए जाने का जिक्र मिलता है।

सूजन और जोड़ों के दर्द में उपयोग

नीली हल्दी के औषधीय गुणों को सूजन और दर्द कम करने में मददगार माना जाता है। खासतौर पर जोड़ों के दर्द और शरीर में होने वाली सूजन के लिए इसका पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के तौर पर इसका इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

इम्यूनिटी और पाचन के लिए भी मानी जाती है फायदेमंद

नीली हल्दी को रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम के लिए भी उपयोगी माना जाता है। बदलते मौसम में होने वाले सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण से शरीर को मुकाबला करने में मदद मिलने का दावा किया जाता है। इसके अलावा गैस, अपच, कब्ज और एसिडिटी जैसी पाचन संबंधी परेशानियों में भी इसके पारंपरिक उपयोग का जिक्र मिलता है।

त्वचा और घावों के लिए भी होती है इस्तेमाल

नीली हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण बताए जाते हैं। इसी वजह से पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल त्वचा संक्रमण, मुंहासे और दाग-धब्बों से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है। इसके अलावा सामान्य हल्दी की तरह इसमें एंटी-सेप्टिक गुण भी माने जाते हैं और पुराने समय से ही अंदरूनी चोट या मोच में इसका लेप लगाने की परंपरा रही है।

हर दुकान पर नहीं मिलती नीली हल्दी

दुर्लभ जड़ी-बूटी होने के कारण नीली हल्दी आम सब्जी मंडी या किराना स्टोर में आसानी से उपलब्ध नहीं होती। यह मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी और जंगलों वाले इलाकों, जैसे मेघालय और पश्चिम बंगाल में उगाई जाती है। इसे बड़े आयुर्वेदिक स्टोर, चुनिंदा ऑर्गेनिक मार्केट और भरोसेमंद ऑनलाइन हर्बल या आयुर्वेदिक पोर्टल्स से खरीदा जा सकता है। कुछ बड़े शहरों में लगने वाले विशेष कृषि मेलों और वन औषधि भंडारों में भी इसके मिलने की संभावना रहती है।

इस्तेमाल से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूरी

अपनी दुर्लभता और पारंपरिक औषधीय उपयोग के कारण नीली हल्दी को किसी खजाने से कम नहीं माना जाता। यदि यह उपलब्ध हो तो स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका सीमित और सही मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में इसका सेवन या औषधीय इस्तेमाल शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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