सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में समाजवादी पार्टी का पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन बुरी तरह फ्लॉप हो गया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की मौजूदगी के बावजूद सभा स्थल पर लोगों से ज्यादा मंच पर नेता नजर आए। खाली कुर्सियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पार्टी की भारी फजीहत हुई, जिसके तुरंत बाद सपा नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरी कन्नौज जिला इकाई को भंग कर दिया और सभी पदाधिकारियों को पदमुक्त कर दिया।
अखिलेश के नाम पर निर्भरता और स्थानीय विफलता
कन्नौज सीट से अखिलेश यादव और डिंपल यादव कई बार सांसद रह चुके हैं, जिससे स्थानीय नेता खुद को सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा मानते हैं। हालांकि, यही जुड़ाव संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। सम्मेलन में जब प्रदेश अध्यक्ष पहुंचे तो नेता मंच पर तो जमा हो गए, लेकिन आम कार्यकर्ताओं और जनता को जुटाने में पूरी तरह नाकाम रहे। इस विफलता ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि शीर्ष नेता से निकटता के बावजूद सांगठनिक जिम्मेदारियों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बीजेपी ने पीडीए नारे और सपा पर कसा तंज
अक्सर बीजेपी रैलियों में खाली कुर्सियों को लेकर तंज कसने वाली समाजवादी पार्टी अब खुद उसी मोर्चे पर घिर गई है। बीजेपी नेताओं ने वायरल वीडियो को हथियार बनाते हुए आरोप लगाया कि सपा का ‘पीडीए’ सिर्फ एक खोखला नारा है और जिन वर्गों के प्रतिनिधित्व का दावा किया जाता है, वे अब पार्टी के कार्यक्रमों से नदारद हैं। अपने ही गढ़ में हुए इस घटनाक्रम ने सपा को एक असहज स्थिति में खड़ा कर दिया है।
अनुशासनहीनता पर पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब अखिलेश यादव ने पूरी जिला इकाई को भंग किया हो। इससे पहले एटा और कासगंज में नेताओं के बीच आपसी वर्चस्व और विवाद के बाद इकाइयों को भंग कर दिया गया था। वहीं, गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं के बीच हुई मारपीट के बाद भी पूरी इकाई पर गाज गिरी थी। कन्नौज का मामला सांगठनिक विफलता का है, लेकिन सपा प्रमुख की कार्रवाई का ढर्रा वही रहा है ताकि पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं में कड़ा संदेश जाए।
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