Sawan Somwar Fasting Rules During Periods: सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है और 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। भगवान शिव को समर्पित इन व्रतों को लेकर हर साल महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि यदि व्रत के दिन पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो क्या सावन सोमवार या सोलह सोमवार का व्रत रखा जा सकता है। इस विषय पर धार्मिक मान्यताओं के मत को जानना महिलाओं के लिए बहुत जरुरी है।
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मंदिर में प्रवेश, शिवलिंग का स्पर्श और भगवान की मूर्ति के सामने उपस्थित होकर पूजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अधिकांश विद्वानों का मानना है कि यदि किसी महिला ने पहले से सावन सोमवार या सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लिया है, तो उसे व्रत बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसी स्थिति में भगवान शिव का मानसिक रूप से स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करना भी पूजा का ही स्वरूप माना गया है। शास्त्रों में मानसिक पूजा को भी विशेष महत्व दिया गया है।
पीरियड्स को माना गया है प्राकृतिक प्रक्रिया
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को पीरियड्स आना नेचुरल है। इस दौरान बताए गए कुछ धार्मिक निषेध महिलाओं को अपवित्र मानने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें पूरा आराम और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह देने के उद्देश्य से बताए गए हैं। चूंकि सावन सोमवार और सोलह सोमवार का व्रत संकल्प के साथ किया जाता है, इसलिए केवल पीरियड्स आने की वजह से इसे तोड़ना जरुरी नहीं माना जाता। हालांकि, इस दौरान स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना जरूरी बताया गया है।
इस तरह कर सकते हैं भगवान शिव की आराधना
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यदि पीरियड्स के कारण मंदिर जाना या शिवलिंग पर जलाभिषेक करना संभव न हो, तो घर पर बैठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप, शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ किया जा सकता है। कई परिवारों में पूजा की सामग्री किसी दूसरे सदस्य से भगवान को अर्पित कराई जाती है, जबकि व्रत रखने वाली महिला मानसिक रूप से पूजा और उपासना करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शरीर की अपेक्षा मन की पवित्रता और श्रद्धा को अधिक महत्व देते हैं।
क्या व्रत बीच में छोड़ना सही?
सोलह सोमवार व्रत को लेकर भी यही मान्यता है कि संकल्प लेने के बाद व्रत को बीच में छोड़ना सही नहीं माना जाता। यदि महिला का स्वास्थ्य सामान्य है, तो वह व्रत जारी रख सकती है। वहीं यदि ज्यादा शारीरिक परेशानी या डॉक्टर से जुड़ा कोई कारण हो, तो स्वास्थ्य को आगे रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी बहुत अच्छा माना गया है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में इस मुद्दे को लेकर अलग मान्यताएं हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा और गुरु या स्थानीय धर्माचार्य के मार्गदर्शन का सम्मान करना चाहिए।
इन बातों का रखें खास ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सावन सोमवार या सोलह सोमवार व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाएं, तो मानसिक पूजा पर खास ध्यान देना चाहिए। पूजा-पाठ की सामग्री, मूर्ति या तस्वीर को स्पर्श करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। महिलाएं थोड़ी दूरी पर बैठकर मन ही मन भगवान शिव का स्मरण, प्रार्थना और मंत्र जाप कर सकती हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ की गई मानसिक उपासना भी भगवान शिव तक पहुंचती है।
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