पश्चिम एशिया और आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को तीन अहम घटनाक्रम सामने आए। अमेरिका ने लेबनान के लिए करीब चार दशक पुरानी सीधी उड़ान पाबंदी हटाने का फैसला सार्वजनिक किया। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों में सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर तीन विमान क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई। दूसरी ओर, सूडान में इथियोपिया की सीमा के पास हुए ड्रोन हमले में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं ने क्षेत्र में सुरक्षा और संघर्ष से जुड़े संकट को फिर चर्चा में ला दिया है।
लेबनान के लिए 1985 से लगी उड़ान पाबंदी हटाई
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिकी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह नागरिक उड्डयन की सुरक्षा के लिए उनके देश की ओर से उठाए गए कदमों पर अमेरिका के भरोसे को दर्शाता है। अमेरिका ने 1985 में TWA फ्लाइट 847 के अपहरण के बाद लेबनान के लिए सीधी उड़ानों पर पाबंदी लगा दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में औन के वॉशिंगटन दौरे के दौरान सीधी उड़ानें फिर शुरू करने की घोषणा की थी। पाबंदी हटाने का आदेश करीब दो सप्ताह पहले जारी हुआ था, लेकिन इसकी जानकारी शनिवार को सार्वजनिक की गई। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इजरायल के साथ संघर्षों के बाद ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह को सैन्य और राजनीतिक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। उसके कई कमांडर मारे गए हैं और संगठन की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर हुई है।
हूती हमलों में रियाद एयरपोर्ट पर तीन विमान क्षतिग्रस्त
दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों के गुरुवार को किए गए हमलों में रियाद एयरपोर्ट पर तीन विमान क्षतिग्रस्त हुए। अधिकारियों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, हमलों में तीन सऊदी नागरिकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। शुक्रवार शाम एक और मिसाइल दागे जाने के बाद हवाई यातायात प्रभावित हुआ। फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों के मुताबिक, कई उड़ानों को दूसरे मार्गों पर भेजना पड़ा। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच संघर्ष जारी है। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन सरकारी बलों को हवाई मदद दे रहा है।
सूडान में ड्रोन हमले में बच्चों समेत 40 लोगों की मौत
सूडान के ब्लू नाइल प्रांत में इथियोपिया की सीमा के पास अबू शंदी इलाके में शुक्रवार को ड्रोन हमला हुआ। संघर्ष पर नजर रखने वाले समूह इमरजेंसी लॉयर्स के मुताबिक, हमले में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। समूह ने इस हमले के लिए अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय ने हमले पर गहरी नाराजगी जताई। RSF अप्रैल 2023 से सूडानी सेना के खिलाफ लड़ रहा है। संघर्ष में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। ACLED के अनुसार, युद्ध में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की मौत का अनुमान है, जबकि राहत संगठनों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
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