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चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद ओडिशा में भारी तबाही, बाढ़ में फंसे 2000 से ज्यादा लोग, एयरलिफ्ट करने की तैयारी

चक्रवात ‘अर्नब’ के गुजरने के बाद ओडिशा के तटीय और पहाड़ी जिलों में हुई मूसलाधार बारिश ने भीषण बाढ़ का रूप ले लिया है। विशेषकर गंजम और गजपति जिलों के कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे 2000 से अधिक लोग अपने घरों में फंस गए हैं। राज्य सरकार फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एयरलिफ्ट करने की योजना बना रही है। मुख्य सचिव अनु गर्ग के अनुसार, कोस्ट गार्ड के हेलिकॉप्टर मंगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क किया गया है। हालांकि, घने बादलों और लगातार बारिश के कारण हवाई परिचालन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए ओडीआरएफ (ODRF) की टीमें फिलहाल नावों के जरिए बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

रिकॉर्ड तोड़ बारिश से नदियां उफान पर

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गंजम जिले के पत्रपुर ब्लॉक में पिछले 24 घंटों के भीतर सर्वाधिक 546.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा सुराडा, सनाखेमुंडी और रंगेलुंडा जैसे ब्लॉकों में भी 200 मिमी से अधिक वर्षा हुई है। भारी बारिश के चलते गंजम की रुशिकुल्या और बहुदा नदियां तथा गजपति जिले की वामसाधारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। धरकोट, पत्रपुर और सनाखेमुंडी ब्लॉकों के दर्जनों गांव मुख्य मार्गों से कट गए हैं। बेहरामपुर शहर के रिहायशी इलाकों में पानी घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और फसलें जलमग्न हो गई हैं।

ट्रेन सेवाएं पूरी तरह ठप

भीषण जलभराव के कारण आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच रेल यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। मुख्य चेन्नई-हावड़ा रेल मार्ग पर इच्छपुरम और झडुपुडी रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी और रेलवे पुल पानी में डूब चुके हैं। स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रियों को नजदीकी स्टेशनों पर रोककर उनके लिए भोजन, पीने का पानी और स्वच्छता की व्यवस्था की जाए, तथा उन्हें बसों के माध्यम से गंतव्य तक भेजा जाए।

केंद्र सरकार से मिला मदद का भरोसा

आपदा की इस घड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से फोन पर बात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र के सहयोग से राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जाएंगे। बारिश थमने और जलस्तर घटने के बाद किसानों की खड़ी धान की फसलों के नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा। वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को ऐसी चरम मौसमी घटनाओं की बड़ी वजह बताया है, जबकि प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अलर्ट रहें और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहें।

 

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