Delhi Hydrogen Train Trail: दिल्ली और हरियाणा के रेल यात्रियों को जल्द आधुनिक रेलवे सुविधा की सौगात मिल सकती है। भारतीय रेलवे दिल्ली और सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू करने की तैयारी में जुटा है। शुरुआती परीक्षण दिल्ली के सब्जी मंडी रेलवे स्टेशन से सोनीपत तक किया जाएगा। यदि यह ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में इस रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जींद- सोनीपत रूट की ट्रेन का होगा इस्तेमाल
ट्रायल के लिए जिस हाइड्रोजन ट्रेन रैक का इस्तेमाल किया जाएगा, वह फिलहाल जींद और सोनीपत के बीच संचालित हो रही है। रेलवे का दावा है कि एक बार हाइड्रोजन फ्यूल भरने के बाद यह ट्रेन चार फेरे पूरे करने में सक्षम है। ट्रायल सफल होने पर जींद से नई दिल्ली और नई दिल्ली से सोनीपत तक इस ट्रेन के संचालन का रास्ता भी खुल सकता है। इससे यात्रियों को कम प्रदूषण वाली, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा सुविधा मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों की जगह रखी जाएंगी रेत की बोरियां
ट्रायल के दौरान ट्रेन में यात्रियों को नहीं बैठाया जाएगा। उनकी जगह रेत की बोरियां रखी जाएंगी, जिनका कुल वजन करीब 2,600 यात्रियों के बराबर होगा। इसका उद्देश्य यह परखना है कि पूरी क्षमता के बराबर भार होने पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है।
10 डिब्बों वाली ट्रेन की होगी तकनीकी जांच
यह हाइड्रोजन ट्रेन कुल 10 डिब्बों की है, जिनमें 8 यात्री कोच शामिल हैं। प्रत्येक कोच में उतनी ही रेत की बोरियां रखी जाएंगी, जितना वजन उस कोच में बैठने और खड़े होने वाले यात्रियों का हो सकता है। इस परीक्षण के दौरान ट्रेन की रफ्तार, ट्रैक पर स्थिरता, पटरियों के साथ तालमेल और अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। रेलवे यह भी परखेगा कि वास्तविक परिस्थितियों में हाइड्रोजन ट्रेन कितनी सुरक्षित और भरोसेमंद साबित होती है।
ट्रायल शुरू होने में क्यों लग सकता है समय
दिल्ली और सोनीपत के बीच ट्रायल शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। इसकी प्रमुख वजह रेलवे की परिचालन व्यवस्था है। जिस ट्रेन का उपयोग ट्रायल में किया जाना है, वह अभी जींद- सोनीपत रूट पर नियमित सेवा में है। ऐसे में उसे कुछ दिनों के लिए उस रूट से हटाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा दिल्ली का रेल सेक्शन काफी व्यस्त रहता है, इसलिए 4 से 5 दिन तक लगातार ट्रायल के लिए अलग समय और ट्रैक उपलब्ध कराना भी चुनौती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है और जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन
यह भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन है, जिसे 17 जुलाई 2026 में जींद- सोनीपत रूट पर परीक्षण के लिए उतारा गया था। अब तक यह 1,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली यह ट्रेन डीजल ट्रेनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है। इसे चलाने के दौरान धुएं की जगह केवल पानी की भाप निकलती है, जिससे प्रदूषण कम होता है और ईंधन की बचत भी होती है।
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