US Midterm Elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद स्वीकार किया है कि ईरान के साथ आठ महीने से जारी युद्ध और पेट्रोल-गैस की बढ़ती कीमतों ने उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बड़ा नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने माना कि युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक दबाव और महंगाई से अमेरिकी मतदाता नाराज थे, जिसका असर चुनावी नतीजों में दिखाई दिया।
सैन्य कार्रवाई का किया बचाव
चुनावी नुकसान स्वीकार करने के बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए यह कदम उठाना जरूरी था और आगे भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
युद्ध को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पद से हटाने की संभावना भी खारिज कर दी। ट्रंप ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि हेगसेथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
हार के बाद डेमोक्रेट्स के साथ काम करने की जताई इच्छा
चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप के रुख में कुछ नरमी भी देखने को मिली। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई दी और देश के हित में उसके साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह देश की भलाई के लिए डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद रखते हैं।
ट्रंप ने स्वीकार की हार
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने की बात कही। हालांकि, इसके बाद वह फिर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आए।
उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की हार की एक वजह खुद का चुनाव मैदान में नहीं होना भी बताया। साथ ही चेतावनी दी कि डेमोक्रेट्स की ओर से लाए जाने वाले ऐसे विधेयकों को वह राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर रोक देंगे, जिनसे वह सहमत नहीं होंगे।
जेडी वेंस ने भी ईरान युद्ध को बताया हार की बड़ी वजह
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया। चुनावी नतीजों से यह संकेत मिला है कि महंगाई और विदेश नीति से जुड़े ट्रंप प्रशासन के फैसले उसके लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनते जा रहे हैं।
चुनावी नतीजों पर ईरान में जश्न का माहौल
दूसरी ओर, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की पार्टी को लगे झटके के बाद ईरान में जश्न मनाया गया। वहां के लोगों ने चुनावी नतीजों को ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ अमेरिकी मतदाताओं का फैसला बताया। बुधवार को राजधानी तेहरान में हजारों लोगों ने मार्च निकाला।
यह आयोजन 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की बरसी की याद में किया गया था। इसके साथ ही लोगों ने अमेरिकी चुनाव के नतीजों का भी जश्न मनाया।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका की नीति पर उठाए सवाल
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र के माध्यम से कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि अमेरिका में राजनीतिक बदलाव आने से इस्लामिक गणराज्य के प्रति उसकी दुश्मनी खत्म हो सकती है, वे बड़ी गलतफहमी में हैं।
उनका यह बयान अमेरिका में सत्ता और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव बने रहने की ओर इशारा करता है।
ईरान के मुख्य वार्ताकार बोले- अमेरिकियों ने युद्ध को ना कहा
ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबॉफ ने बुधवार को अमेरिकी चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “अमेरिकियों ने युद्ध को ना कहा है, और हम इस संदेश का समर्थन करते हैं।”
ईरान में न्यायपालिका द्वारा संचालित एक समाचार आउटलेट ने भी एक्स पर एक चर्चित मजाक साझा किया। इसमें कहा गया, “ट्रंप ईरान में तो सत्ता बदलने में नाकाम रहे, लेकिन टेक्सास में कामयाब हो गए।”
यह टिप्पणी अमेरिका के दक्षिणी राज्य टेक्सास के संदर्भ में की गई, जहां दशकों में पहली बार किसी डेमोक्रेट उम्मीदवार ने सीनेट का चुनाव जीता है। इस तरह अमेरिकी चुनावी नतीजे न केवल ट्रंप प्रशासन की घरेलू नीतियों, बल्कि उसकी विदेश नीति और ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर भी चर्चा का विषय बन गए हैं।
Read More:
मछुआरों को बचाने गईं SDRF की दो नावें पलटीं, 10 कांस्टेबल लापता, तेलंगाना में बड़ा हादसा

