वैश्विक व्यापार और शिपिंग सेक्टर में चीन के दशकों पुराने वर्चस्व को चुनौती देने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। समुद्र के रास्ते होने वाले खरबों रुपये के व्यापार में इस्तेमाल होने वाले लोहे के शिपिंग कंटेनरों के निर्माण में अब तक 95% हिस्सेदारी के साथ चीन का एकाधिकार रहा है। इस मोनोपॉली को तोड़ने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 28 अक्टूबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम’ (CMPS) को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने इस महत्वकांक्षी योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य वैश्विक कंटेनर बाजार में 15 से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्जा जमाना है।
उत्पादन क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU करने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भारत में हर साल लगभग 70,000 TEU (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) कंटेनर बनाने की क्षमता है। सरकार की नई योजना के तहत इस उत्पादन क्षमता में दस गुना से अधिक का इजाफा किया जाएगा, जिससे इसे सालाना 7.5 लाख TEU तक पहुंचाया जा सके। इस योजना के दायरे में नए कारखानों की स्थापना के साथ-साथ पहले से मौजूद निर्माण इकाइयों का विस्तार भी शामिल है। अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली यह वित्तीय सहायता नीति वित्त वर्ष 2040 तक लगातार जारी रहेगी।
10,000 करोड़ के बजट का वित्तीय और रणनीतिक बंटवारा
इस विशाल फंड का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से किया जाएगा ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें:
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8,891 करोड़ रुपये की सब्सिडी: यह भारी राशि निर्माताओं को ऑपरेशनल खर्चों में मदद के रूप में दी जाएगी। इसका उद्देश्य भारत और विदेशी निर्माताओं के बीच लागत के अंतर को पाटकर भारतीय कंटेनरों को वैश्विक मानकों के अनुकूल और किफायती बनाना है।
- 859 करोड़ रुपये ब्याज छूट: कंपनियों को कम लागत पर कर्ज उपलब्ध कराने के लिए ब्याज दरों में भारी छूट दी जाएगी।
- 150 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर: उच्च गुणवत्ता वाली टेस्टिंग लैब्स और अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशंस के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करने पर खर्च होंगे।
घरेलू स्टील उद्योग को बढ़ावा और बंपर रोजगार के अवसर
इस योजना से देश के स्टील सेक्टर की भी भारी चांदी होने वाली है। सरकार स्थानीय इस्पात कंपनियों को विशेष ‘कंटेनर-ग्रेड स्टील’ यानी अत्यधिक मजबूत और टिकाऊ लोहा बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे न केवल मुख्य इस्पात उद्योगों को बड़ा बाजार मिलेगा, बल्कि कंटेनर के कोने तैयार करने वाले, लकड़ी के फ्रेम बनाने वाले और विशेष कोटिंग पेंट का निर्माण करने वाले छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी विकास के नए रास्ते खुलेंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी योजना से प्रत्यक्ष रूप से 3,000 नई नौकरियां और अप्रत्यक्ष तौर पर 50,000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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