हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को जारी किया गया समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। HERC के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की पीठ ने यह बड़ा आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत कंपनी को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्षों के लिए दिया गया लाइसेंस अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो गया है।
राज्य सरकार ने धारा 108 के तहत जारी किए थे सख्त निर्देश
यह ऐतिहासिक फैसला हरियाणा सरकार के कड़े हस्तक्षेप के बाद आया है। राज्य सरकार ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्रदेश में कोई भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न दिया जाए और न ही किसी निजी कंपनी को ऐसा लाइसेंस चलाने की अनुमति दी जाए। गौरतलब है कि आयोग द्वारा 19 अक्टूबर को निजी कंपनी को लाइसेंस देने के आदेश जारी किए जाने के बाद से ही राज्य सरकार लगातार इसका कड़ा विरोध कर रही थी।
सरकारी खजाने और बिजली निगमों के घाटे पर जताई गई थी चिंता
राज्य सरकार ने आयोग के समक्ष दलील दी थी कि निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने से राज्य के राजस्व पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। सरकार का तर्क था कि यदि बड़े और औद्योगिक उपभोक्ता निजी कंपनी की ओर स्थानांतरित हो जाएंगे, तो सरकारी बिजली वितरण निगमों (DHBVN/UHBVN) का घाटा अत्यधिक बढ़ जाएगा। इससे राज्य में वर्षों से चल रही क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका थी, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता।
किसान, आम उपभोक्ता और बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा
इस पूरे मामले में सरकार ने राज्य के किसानों, आम बिजली उपभोक्ताओं और बिजली निगमों के कर्मचारियों की चिंताओं एवं भविष्य का हवाला दिया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि कृषि और घरेलू क्षेत्र को सस्ती बिजली मुहैया कराने के लिए सरकारी निगमों का आर्थिक रूप से मजबूत रहना अनिवार्य है। इसके अलावा, आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मामले की दोबारा सुनवाई की मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
READ MORE: शिपिंग कंटेनर बनाने के लिए सरकार ने दी 10,000 करोड़ की स्कीम, टूटेगी ड्रैगन की मोनोपॉली

