संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद के दोनों सदनों में पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है। लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान, आयकर संशोधन समेत सात प्रमुख विधेयक सरकार के एजेंडे में शामिल हैं।
FCRA और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े बदलाव प्रस्तावित
सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन का प्रस्ताव लाएगी। मसौदे के अनुसार, जिन संगठनों का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाएगा, उसका नवीनीकरण नहीं होगा या सरकार नवीनीकरण से इनकार करेगी, उनके पंजीकरण को निरस्त करने का स्पष्ट प्रावधान किया जाएगा।
इसके अलावा ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह विधेयक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) की जगह नया नियामक ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव रखता है। इसमें राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) को भी नए ढांचे के दायरे में लाने का प्रावधान है। फिलहाल यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विचाराधीन है।
आयकर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई विधेयक एजेंडे में
मानसून सत्र में आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किया जा सकता है, जो हालिया अध्यादेश का स्थान लेना और बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत के ऋण बाजार को मजबूत करना बताया गया है।
इसके अलावा सरकार सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने संबंधी अध्यादेश को विधायी मंजूरी दिलाने की कोशिश करेगी।
सरकार पंजीकरण एवं मृत्यु (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक और MSME विकास (संशोधन) विधेयक भी सदन में ला सकती है। इनका उद्देश्य जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों को सख्त करना और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए व्यापार सुगमता बढ़ाना है।
आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में विपक्ष
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुका है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे NEET-UG पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा गबन और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान विधायी कार्यों के साथ-साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
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