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हेल्पलाइन से नहीं मिली मदद, तो देवदूत बनीं नर्स, महाराष्ट्र में चलती ट्रेन के भीतर हुआ बच्ची का जन्म

36 साल की अंजुम अपनी 11 और 8 साल की बेटियों के साथ दुरंतो एक्सप्रेस से नागपुर से मुंबई जा रही थीं और रात करीब 10 बजे से ही उन्हें लेबर पेन हो रहा था। जब उन्होंने अपनी बात बताई, तब 24 जून की रात के करीब 2 बज चुके थे। ट्रेन महाराष्ट्र के जलगांव ज़िले में भुसावल से तेज़ी से गुज़र रही थी और आगे कोई स्टॉप नहीं था। यात्रियों ने बार-बार रेलवे हेल्पलाइन 139 पर कॉल किया, लेकिन जवाब मिला कि मदद अगले स्टेशन पर ही मिल पाएगी।

कोच S5 में यात्रा कर रहीं बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्टाफ़ नर्स, 27 साल की मीनू भैसारे मदद के लिए आगे आईं। भैसारे ने बताया, “उन्होंने अपने आस-पास के यात्रियों को दर्द असहनीय होने के बाद ही बताया। जब मैं उनके पास पहुँची, तो एमनियोटिक सैक (बच्चेदानी की थैली) पहले ही फट चुकी थी और बच्चे का सिर बाहर आने लगा था। मेडिकल मदद के लिए 15-20 मिनट और इंतज़ार करने की कोई गुंजाइश नहीं थी।” उन्होंने चलती ट्रेन में ही, जो कुछ भी सामान उपलब्ध था, उसी की मदद से बच्चे की डिलीवरी कराई।

बर्थ के चारों ओर चादरें लटकाकर की डिलीवरी

यात्रियों ने एक साइड लोअर बर्थ के चारों ओर चादरें लटकाकर डिलीवरी के लिए एक अस्थायी प्राइवेट जगह बनाने में मदद की। ट्रेन में यात्रा कर रही एक नर्सिंग स्टूडेंट ने भी मदद की। जब गर्भनाल काटने के लिए कोई स्टरलाइज़्ड ब्लेड नहीं मिला, तो भैसारे ने एक चाकू का इस्तेमाल किया जिसे अच्छी तरह धोया गया था और उनके पर्सनल हैंड सैनिटाइज़र से सैनिटाइज़ किया गया था। फिर उन्होंने माँ से मिले धागे का इस्तेमाल करके गर्भनाल को बांधा और काटा, प्लेसेंटा को बाहर निकाला, और पानी, रुई और नैपकिन का इस्तेमाल करके माँ और नवजात शिशु दोनों को साफ़ किया।

पूरी डिलीवरी चलती ट्रेन में ही हुई। इस मुश्किल समय में भैसारे का मुख्य ध्यान माँ और नवजात शिशु दोनों की सुरक्षा और सेहत पर था। रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डिलीवरी के बाद, जब ट्रेन सुबह लगभग 2:50 बजे चालीसगाँव स्टेशन पहुँची, तो रेलवे की मेडिकल टीम ने माँ और उसकी बच्ची की देखभाल की।

यह घटना अचानक आई मुश्किल स्थितियों में ट्रेंड मेडिकल प्रोफ़ेशनल्स की अहम भूमिका और इमरजेंसी के समय लोगों और साथी यात्रियों की सूझबूझ को दिखाती है, खासकर तब जब कोई औपचारिक मेडिकल सुविधा उपलब्ध न हो।

 

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