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बेनामी संपत्ति और सस्ते दाम में जमीन! जानिए IRCTC घोटाले में कैसे फंसा लालू परिवार?

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित IRCTC होटल्स धन-शोधन मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने इन सभी के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3 और धारा 4 के तहत मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।

सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने दर्ज किया केस

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने पाया कि लालू प्रसाद यादव ने तत्कालीन रेल मंत्री के रूप में अपने पद और शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए पुरी और रांची स्थित रेलवे होटलों के संचालन का अनुबंध ‘मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड’ को अवैध तरीके से सौंपा था।

होटल ठेके के बदले सस्ते दामों में मिली जमीन

जांच में खुलासा हुआ कि होटल संचालन का ठेका देने के एवज में लालू यादव के करीबी सहयोगी प्रेम चंद गुप्ता के परिवार द्वारा नियंत्रित कंपनी ‘मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर दो एकड़ की बेशकीमती भूमि वास्तविक बाजार मूल्य से बेहद कम दरों पर हस्तांतरित की गई। बाद में इस पूरी भूमि और कंपनी का मालिकाना हक नाममात्र की कीमत पर शेयर खरीद के जरिए राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे जमीन का प्रभावी स्वामित्व यादव परिवार के पास पहुंच गया।

44.75 लाख रुपये की संपत्ति की जा चुकी है कुर्क

जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए ईडी ने पीएमएलए की धारा 5 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर ₹44,75,000 मूल्य की संपत्तियों को पहले ही कुर्क कर लिया है, जिसकी पुष्टि न्याय-निर्णयन प्राधिकारी द्वारा भी की जा चुकी है। इसके बाद ईडी ने 24 अगस्त 2018 को राउज एवेन्यू जिला न्यायालय, नई दिल्ली में विशेष न्यायाधीश के समक्ष अपनी अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की थी।

मामले से जुड़े 6 अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा

राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के साथ-साथ इस मामले से जुड़े 6 अन्य आरोपियों को भी कानूनी परीक्षण और मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। अदालत के इस सख्त रुख से RJD प्रमुख और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

 

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