उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में ग्राहकों के बैंक खातों से लगभग 10.24 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक की ही एक महिला कर्मचारी दीपांशी ने अन्य बैंक अधिकारियों की गुप्त यूजर आईडी और पासवर्ड का अनाधिकृत रूप से इस्तेमाल कर, पिछले करीब तीन वर्षों तक ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया। इस गंभीर वित्तीय फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 29 अक्टूबर को औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब 16 सितंबर को संगीता नाम की एक खाताधारक अपनी पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुँचीं। उनके खाते से तीन संदिग्ध और अनजान ट्रांजेक्शन हुए मिले। जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो आरोपी महिला कर्मचारी दीपांशी ने उन लेन-देन को वैध साबित करने की कोशिश की, लेकिन बैंक जांच में उन ट्रांजेक्शन से जुड़े कोई वाउचर या आधिकारिक अनुमति के दस्तावेज नहीं मिले। पूछताछ के दौरान दीपांशी ने कथित तौर पर यह कबूल किया कि उसने आशुतोष पाठक के कहने पर यह रकम ट्रांसफर की थी और बाद में वाउचरों को भी नष्ट कर दिया था।
छह अधिकारियों की यूजर आईडी का दुरुपयोग
बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया है कि इस सुनियोजित घोटाले को अंजाम देने के लिए सीनियर ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की समेत कुल छह अधिकारियों की सीबीएस (CBS) यूजर आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल किया गया। चुराई गई रकम मुख्य रूप से आशुतोष पाठक के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों में भेजी गई। पीड़ितों को भनक न लगे, इसके लिए कुछ ग्राहकों के खातों के मोबाइल अलर्ट भी बंद कर दिए गए थे। इसके अलावा बैंक की जांच में 49 फिक्सड डिपॉजिट (FD) में भी गड़बड़ी पाई गई, जिसमें समय से पहले एफडी तुड़वाकर पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का अंदेशा है।
दीपांशी और आशुतोष समेत अन्य पर केस दर्ज
बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय द्वारा 23 अक्टूबर को दी गई लिखित शिकायत के आधार पर, सीबीआई ने दीपांशी, आशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच डीएसपी डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी गई है। अब सीबीआई यह गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में कुल कितने ग्राहक प्रभावित हुए हैं, सटीक रूप से कितनी रकम का गबन हुआ है और इस पूरे सिंडिकेट में बैंक के भीतर या बाहर के अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
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