मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगाई गई ट्रांजिट पाबंदियों से भारत, चीन, इराक और कतर को छूट देने का ऐलान किया है। इस फैसले से इन देशों के जहाजों को समुद्री मार्ग से आवाजाही में आसानी होगी। भारत के लिए इससे नौवहन और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने एक इंटरव्यू में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमने फिलहाल भारत, चीन, इराक और कतर को होर्मुज में ट्रांजिट पाबंदियों से मुक्त कर दिया है। इन देशों के जहाज स्वतंत्र रूप से गुजर रहे हैं और अमेरिकी भी उन्हें नहीं रोकते हैं।”
भारत को दवाओं की जरूरत से जुड़ा फैसला
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत को छूट देने के पीछे ईरान की जरूरी दवाओं की मांग भी एक अहम वजह है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध के कारण ईरान को वैश्विक बाजारों से दवाएं हासिल करने में मुश्किल हो रही है। भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग ईरान के लिए महत्वपूर्ण सप्लायर है। भारतीय जहाजों को रास्ता मिलने से ईरान के लिए दवाओं और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति आसान हो सकती है। वहीं, चीन को छूट देने के पीछे ईरान की राजनीतिक और आर्थिक रणनीति मानी जा रही है। चीन ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में ईरान का बड़ा साझेदार है। अमेरिकी दबाव के बीच बीजिंग का राजनयिक समर्थन भी तेहरान के लिए अहम है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज?
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है। भारत के लिए यह कच्चे तेल, गैस और ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 45 प्रतिशत और LPG आयात का लगभग 90 प्रतिशत इसी रास्ते से आता था। इसके अलावा भारत अपनी LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा, खासकर कतर और UAE से, इसी समुद्री मार्ग के जरिए पूरा करता है। ऐसे में ईरान की ओर से दी गई छूट भारतीय ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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